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खुद Depression का शिकार रह चुके हैं Rishab Sharma, Mental Health के लिए लोगों को देते संगीत थेरेपी

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 27 Feb, 2026 09:15 PM
खुद Depression का शिकार रह चुके हैं Rishab  Sharma, Mental Health के लिए लोगों को देते संगीत थेरेपी

नारी डेस्क : जब Rishab Rikhiram Sharma सितार के तार छेड़ते हैं, तो माहौल अचानक शांत हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे शोर से भरी दुनिया कुछ देर के लिए थम गई हो। उनकी धुनों में एक अजीब-सा सुकून है, जो सीधे दिल और दिमाग तक पहुंचता है। ऋषभ महज 10 साल के थे, जब उनके नन्हे हाथों ने पहली बार सितार को थामा। बचपन से ही संगीत उनके जीवन का हिस्सा बन गया, लेकिन यह सफर केवल रियाज़ और मंच तक सीमित नहीं रहा यह सफर हीलिंग और मेंटल पीस तक पहुंचा।

जब संगीत बना सहारा

ऋषभ आज “Sitar For Mental Health” के ज़रिए दुनिया भर में कॉन्सर्ट करते हैं। मेंटल हेल्थ उनके लिए सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत अनुभव है। एक समय ऐसा भी था जब वे खुद डिप्रेशन से जूझ रहे थे। उस अंधेरे दौर से बाहर निकलने के लिए उन्होंने दवाइयों से ज़्यादा संगीत थेरेपी को चुना। साल 2020 में उनके दादाजी का निधन हुआ। यह सदमा उनके लिए बेहद गहरा था। वे अंदर से टूट गए, अकेले और गुमसुम रहने लगे। लेकिन इसी टूटन के बीच उन्होंने फिर से अपनी सितार उठाई। इस बार स्टेज पर परफॉर्म करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को जोड़ने और हील करने के लिए।

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‘Sitar For Mental Health’ की शुरुआत

यहीं से एक नए मिशन ने जन्म लिया, Sitar For Mental Health। यह केवल एक म्यूज़िक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन गया जो कहीं न कहीं खुद को खो चुके थे। ऋषभ की धुनों से लोग जुड़ते गए, रोते गए, संभलते गए और सुकून पाते गए।

अंतरराष्ट्रीय पहचान

ऋषभ आज संयुक्त राष्ट्र (UN) के पहले Mental Health Music Advocate हैं। इतना ही नहीं, वे White House में सितार बजाने वाले पहले भारतीय कलाकार भी बने। इसके बाद उनके सफर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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गुरु से मिली सोच

ऋषभ को अपने गुरु Pandit Ravi Shankar से यह सीख मिली कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि मन को शांत करने और आत्मा को सुकून देने का सबसे सशक्त माध्यम है।” पं. रवि शंकर के मार्गदर्शन में ऋषभ ने न सिर्फ तकनीक सीखी, बल्कि संगीत की आत्मिक गहराई को समझा। आज के दौर में, जब बहुत कम युवा क्लासिकल सितार की ओर आते हैं, ऋषभ ने इस कला को दोबारा जीवित कर दिया है।

सितार जो इलाज बन गया

आज ऋषभ ऋकिरम शर्मा का संगीत मनोरंजन नहीं, बल्कि थेरेपी है। उनकी धुनें बताती हैं कि टूटने के बाद भी जुड़ा जा सकता है, और दर्द के बीच से भी सुकून निकाला जा सकता है।

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