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हरियाणा के एक गांव में 15 दिनों में 12 लोगों की मौत, ये लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सतर्क

  • Edited By Monika,
  • Updated: 21 Feb, 2026 07:49 PM
हरियाणा के एक गांव में 15 दिनों में 12 लोगों की मौत, ये लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सतर्क

नारी डेस्क : स्वच्छ पानी और शुद्ध भोजन हर इंसान के लिए जीवन की बुनियादी जरूरत हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक गंदा पानी पीता है या दूषित भोजन करता है, तो इससे सेहत को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं। इसी खतरे की एक भयावह तस्वीर हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में सामने आई है, जहां बीते 15 दिनों के भीतर 12 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 5 स्कूली बच्चे भी शामिल हैं, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल है। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में तैनात कर दी गई हैं और सैकड़ों लोगों की स्क्रीनिंग व जांच की जा रही है।

एक जैसे लक्षणों से बिगड़ी हालत

ग्रामीणों के मुताबिक, सबसे पहले करीब 15 दिन पहले तीन लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। इसके बाद गांव में मौतों का सिलसिला जारी है। ज्यादातर मरीजों में बुखार, खांसी, बदन दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण पाए गए हैं। अब तक जिन लोगों की जान गई, उनमें भी यही लक्षण सामने आए हैं।

हर घर में बीमार, लोग दहशत में

छायंसा गांव मुस्लिम बाहुल्य है और आबादी लगभग 5 हजार बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का शायद ही कोई घर ऐसा हो जहां कोई बीमार न हो। परिजन अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कई मरीजों की हालत में सुधार नहीं हो रहा।

हेपेटाइटिस-B और C की आशंका

स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में
4 मौतों का कारण हेपेटाइटिस-B और C बताया गया
3 मामलों में लिवर इंफेक्शन और मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर की पुष्टि हुई
हालांकि, गांव में लगातार हो रही मौतों की स्पष्ट वजह अब तक पूरी तरह सामने नहीं आई है।

पानी की सप्लाई बनी बड़ी चिंता

जांच के दौरान गांव में पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं।
107 पानी के सैंपल लिए गए
इनमें से 23 सैंपल फेल पाए गए
कई सैंपल में बैक्टीरिया ग्रोथ और क्लोरीन की कमी मिली
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ घरों में सरकारी पानी, तो कई जगह टैंकर और अंडरग्राउंड टैंकों का पानी इस्तेमाल किया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग का बयान

स्वास्थ्य विभाग की डॉक्टर सतिंदर वशिष्ठ ने बताया कि:
1 फरवरी से गांव में जांच शुरू की गई
4 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं
अब तक 400 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग
करीब 300 ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे गए
2 मरीजों में हेपेटाइटिस-B और C की पुष्टि, जिन्हें पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि
बीमारी की असल वजह जल्द सामने लाई जाए
गांव में स्वच्छ पानी की व्यवस्था की जाए
प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए।

गंदे पानी से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं और शरीर पर क्या असर पड़ता है?

गंदा या दूषित पानी पीना सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है। इसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और केमिकल्स मौजूद हो सकते हैं।
जो सीधे शरीर में जाकर गंभीर बीमारियां पैदा करते हैं।

पेट से जुड़ी बीमारियां (सबसे ज्यादा खतरा)

दस्त और डायरिया
बार-बार पतले दस्त
शरीर में पानी की भारी कमी
बच्चों और बुजुर्गों में जान का खतरा

हैजा (Cholera
अचानक तेज दस्त
उल्टी, डिहाइड्रेशन
समय पर इलाज न मिले तो मौत तक हो सकती है

पेचिश (Dysentery)
खून या म्यूकस वाला दस्त
पेट दर्द, बुखार
कमजोरी

लिवर को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारियां
हेपेटाइटिस A और E
गंदे पानी से सबसे ज्यादा फैलती हैं
आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
भूख न लगना, उल्टी
लिवर सूज सकता है
गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस-E जानलेवा हो सकता है।

टाइफाइड (Typhoid)
लंबे समय तक तेज बुखार
सिरदर्द, पेट दर्द
कमजोरी और वजन कम होना
आंतों में छेद तक हो सकता है

त्वचा से जुड़ी बीमारियां
खुजली और रैश
फंगल इंफेक्शन
फोड़े-फुंसी
एलर्जी
खासकर नहाने या कपड़े धोने में गंदा पानी इस्तेमाल करने से।

बच्चों पर गंदे पानी का असर
बार-बार बीमार पड़ना
कुपोषण
शारीरिक और मानसिक विकास रुकना
इम्युनिटी कमजोर होना

लंबे समय तक गंदा पानी पीने से होने वाले खतरनाक असर

किडनी डैमेज: पानी में मौजूद भारी धातुएं (आर्सेनिक, लेड)
कैंसर का खतरा: लंबे समय तक केमिकल मिला पानी पीने से
इम्यून सिस्टम कमजोर: शरीर बार-बार संक्रमण की चपेट में आता है।

गंदे पानी से बचाव कैसे करें?

पानी को उबालकर पिएं
क्लोरीन टैबलेट या फिल्टर का इस्तेमाल करें
टंकी और हौदी की नियमित सफाई
खुले में रखा पानी न पिएं
बच्चों को बाहर का पानी पीने से रोकें।

गंदा पानी सिर्फ पेट की बीमारी ही नहीं, बल्कि लिवर, किडनी, त्वचा और पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। समय रहते सावधानी और साफ पानी का इस्तेमाल ही सबसे बड़ा बचाव है।
 

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