
नारी डेस्क : भारतीय धर्म परंपरा में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक और मानसिक प्रभाव वाला समय माना गया है। विशेष रूप से चंद्र ग्रहण के बाद शुद्धिकरण स्नान को बेहद आवश्यक बताया गया है। मान्यता है कि ग्रहण काल के दौरान वातावरण में सूक्ष्म ऊर्जा परिवर्तन होते हैं, जिनका असर मन, शरीर और कुंडली के ग्रहों पर पड़ता है। इस वर्ष 3 मार्च को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण समाप्त होते ही कुछ विशेष नियमों का पालन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और नवग्रहों की स्थिति संतुलित होती है। कई ग्रंथों, जैसे गरुड़ पुराण, में भी ग्रहण के बाद शुद्धि और स्नान का उल्लेख मिलता है।
ग्रहण समाप्त होते ही क्या करें?
ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद सबसे पहला कार्य शुद्धिकरण स्नान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल को सूतक माना जाता है और स्नान के बिना इसका प्रभाव समाप्त नहीं होता। इसलिए जैसे ही ग्रहण समाप्त हो, यथाशीघ्र स्नान करना शुभ माना गया है।

स्नान क्यों है आवश्यक?
भारतीय संस्कृति में स्नान केवल शरीर की सफाई नहीं, बल्कि आत्मिक और मानसिक शुद्धि का माध्यम है। मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है, जो मन को अशांत कर सकती है। स्नान इन नकारात्मक प्रभावों को शांत करता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है।
जल में मिलाएं यह एक पवित्र तत्व
चंद्र ग्रहण के बाद स्नान करते समय पानी में थोड़ा सा गंगाजल अवश्य मिलाएं। गंगाजल को अत्यंत पवित्र और दिव्य माना गया है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक माना जाता है। यदि गंगाजल उपलब्ध न हो, तो तुलसी के कुछ पत्ते जल में डालकर स्नान करना भी शुभ फलदायी होता है।

नवग्रहों को ऐसे करें प्रसन्न
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत मन से अपने इष्ट देव का ध्यान करें। नवग्रहों की शांति के लिए “ॐ नवग्रहाय नमः” मंत्र का जप करें। चंद्र देव की कृपा के लिए उन्हें कच्चा दूध या जल अर्पित करना भी शुभ माना गया है।
शनि दोष से मुक्ति का उपाय
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि का प्रभाव अधिक होता है, उनके लिए ग्रहण के बाद स्नान कर काले तिल का दान करना विशेष लाभकारी माना गया है। इससे शनि से जुड़ी बाधाएं कम होती हैं और मानसिक तनाव में राहत मिलती है।