नारी डेस्क : होली का पर्व सिर्फ रंगों और मस्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शुद्धि, नकारात्मकता के अंत और नई शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है। रंगों वाली होली से एक रात पहले होने वाला होलिका दहन (Holika Dahan 2026) इसी भावना को दर्शाता है। इस पावन अग्नि में पुराने सामान, सूखे पत्ते और खासतौर पर गोबर के उपले चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन इसके पीछे केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
नकारात्मकता का अंत और नई शुरुआत
होलिका दहन की अग्नि को बुराइयों का नाश करने वाली माना जाता है। घर में पड़ा पुराना, टूटा-फूटा या बेकार सामान हमारे जीवन की पुरानी यादों, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। जब हम इन्हें अग्नि में समर्पित करते हैं, तो इसका अर्थ होता है। पुराने बोझ को छोड़कर नए उत्साह और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना। इसीलिए होलिका दहन को नई शुरुआत का पर्व भी कहा जाता है।

गोबर के उपलों का धार्मिक महत्व
होलिका दहन में गाय के गोबर से बने उपलों की माला चढ़ाना विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उपले भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के अहंकार के दहन का प्रतीक हैं। कई स्थानों पर परिवार के हर सदस्य के नाम से एक-एक उपला अग्नि में अर्पित किया जाता है, जिसे रक्षा कवच माना जाता है। यह परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक है।
वैज्ञानिक वजह भी है खास
होलिका दहन का समय ऋतु परिवर्तन का होता है। इस दौरान हवा में बैक्टीरिया और कीटाणु तेजी से बढ़ते हैं। जब गोबर के उपले, घी, कपूर और सूखी लकड़ियां जलती हैं, तो उनसे निकलने वाला धुआं प्राकृतिक कीटनाशक की तरह काम करता है। इससे वातावरण शुद्ध होता है और मौसमी बीमारियों का खतरा कम होता है। यही वजह है कि यह परंपरा वैज्ञानिक रूप से भी उपयोगी मानी जाती है।

पवित्रता और स्वच्छता का संदेश
प्राचीन काल में होलिका दहन से पहले पूरे गांव और घरों की विशेष सफाई की जाती थी। सर्दियों में जमा कचरा, बिना जरूरत का सामान और सब एक जगह इकट्ठा कर जला दिया जाता था। इससे गंदगी दूर होती थी, वातावरण शुद्ध रहता था और समाज में स्वच्छता का संदेश जाता था।
होलिका दहन में बरतें ये सावधानियां
पुराने सामान के नाम पर प्लास्टिक, रबर या सिंथेटिक चीजें न जलाएं
अग्नि के आसपास गंदगी न करें
तामसिक या अपवित्र वस्तुएं गलती से भी न डालें
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का ध्यान रखें।

होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। पुराने सामान और गोबर के उपलों की आहुति हमें यह सिखाती है कि पुराने को छोड़कर, शुद्ध मन और सकारात्मक ऊर्जा के साथ नए जीवन की शुरुआत करें।