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शीतला अष्टमी पर क्या करें और क्या न करें? रखें इन जरूरी बातों का ध्यान

  • Edited By Monika,
  • Updated: 10 Mar, 2026 04:18 PM
शीतला अष्टमी पर क्या करें और क्या न करें? रखें इन जरूरी बातों का ध्यान

नारी डेस्क : शीतला अष्टमी होली के लगभग आठ दिन बाद मनाई जाती है। इसे बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां शीतला की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और रोग-दोष दूर होते हैं। हालांकि इस दिन पूजा और व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं। अगर आप पहली बार शीतला अष्टमी का व्रत रख रहे हैं या पूजा करने जा रहे हैं, तो आपको यह जरूर जान लेना चाहिए कि इस दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।

शुभ मुहूर्त
(सुबह 6ः36 - शाम 6ः27 बजे )
मंत्रः ॐ शीतलायै नमः  का जाप करें।

इस दिन खासतौर पर इन बातों का ध्यान रखें

बासी भोजन का भोग लगाएं

शीतला अष्टमी के दिन बासी भोजन करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार अष्टमी के दिन सुबह घर में खाना नहीं बनाया जाता। इसलिए सप्तमी की रात को ही माता को मीठे चावल, मीठी रोटी जो गन्ने व गुड़ के रस से बनाए जाते हैं, ही अर्पित की जाती है। इसी प्रसाद को घर के सभी सदस्यों को खिलाया जाता है। शीतला अष्टमी के दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनता। अष्टमी की सुबह इन्हीं व्यंजनों का भोग मां शीतला को लगाया जाता है।

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नीम के पत्तों का प्रयोग करें

धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शीतला को नीम बहुत प्रिय है। इसलिए शीतला अष्टमी के दिन नहाने के पानी में नीम के पत्ते डालना और पूजा के दौरान नीम की टहनी रखना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मां शीतला की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

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घर की साफ-सफाई करें

शीतला अष्टमी की पूजा से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करना जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां शीतला को स्वच्छता और पवित्रता बहुत प्रिय होती है, इसलिए इस दिन घर का कोना-कोना साफ रखना शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मां शीतला की कृपा प्राप्त होती है।

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ठंडा जल चढ़ाएं

शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला को जल अर्पित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जल ठंडा हो। पूजा के बाद उस जल की कुछ बूंदें घर के कोनों में छिड़कना और अपनी आंखों पर लगाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मां शीतला की कृपा प्राप्त होती है। 

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दान-पुण्य करें

शीतला अष्टमी के दिन जरूरतमंद लोगों को ठंडा भोजन और जल दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन दान करने से मां शीतला प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखती हैं, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

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इस दिन क्या ना करें

चूल्हा न जलाएं: शीतला अष्टमी के दिन घर में आग जलाने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन चूल्हा जलाने से मां शीतला नाराज हो सकती हैं।
गर्म भोजन न खाएं: इस दिन ताजा या गर्म भोजन नहीं बनाया जाता। इसलिए पूरे दिन ठंडा या पहले से बना हुआ भोजन ही ग्रहण किया जाता है।
सुई-धागे का काम न करें: इस दिन सिलाई-कढ़ाई या सुई-धागे से जुड़े काम करने से भी बचना चाहिए।
तामसिक भोजन से दूर रहें: किसी भी धार्मिक पर्व की तरह इस दिन मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए।
सिर और कपड़े न धोएं: कई जगहों पर इस दिन महिलाओं के लिए सिर और कपड़े धोने की भी मनाही होती है, इसलिए इन नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।

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