नारी डेस्क : अपने जमाने की एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी एक्टिंग के साथ अपने खुशमिजाज और मुंह फट नेचर के लिए जानी जाती रही है। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने राजेश खन्ना के साथ अपने काम के एक्सपीरेयंस को शेयर किया जिसमें उन्होंने काका को 'अनपढ़ गुंडा' और 'अटेंशन सीकर' कह दिया। उनके मुताबिक, काका (राजेश खन्ना) हमेशा चमचों और चापलूसों से घिरे रहते थे और सेट पर उन्हें गालियां सिखाते थे। राजेश खन्ना का व्यवहार एक बिगड़े हुए बच्चे जैसा था, जो स्टारडम के अहंकार में रहते थे।

उन्होंने तो यह तक भी कह दिया कि सुपरस्टार राजेश खन्ना ने जो झेला वो सब उनके कर्मों का फल था। उनका पतन और जो अकेलापन झेला उसकी वजह कोई और नहीं वो खुद थे। यह उन्होंने अमिताभ बच्चन संग राजेश खन्ना की तुलना करते हुए कहा था। मौसमी चटर्जी ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरुआत की और धर्मेंद्र, राजेश खन्ना अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। तभी उन्होंने अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना दोनों स्टार्स सेट पर कैसे थे और अपना स्टारडम हैंडल करते थे, के बारे में बताया।
हमेशा अपने 'चमचे-चमचियों' के साथ आते थे नजर
राजेश खन्ना के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें पैंपरिंग चाहिए होती थी, वहीं अमिताभ बच्चन के बारे में उन्होंने कहा कि अमिताभ को जहां 'चमचा-चमची' की जरूरत नहीं थी, वहीं राजेश खन्ना हमेशा अपने 'चमचे-चमचियों' के साथ नजर आते थे। ये इंटरव्यू उन्होंने फिल्मफेयर को दिया और कहा था कि 'अमिताभ बच्चन को मैंने 'चमचा चमची' के साथ कभी नहीं देखा। मैंने उनके आसपास कभी ऐसे दोस्त नहीं देखे जिनकी जरूरत न हो, लेकिन राजेश खन्ना के साथ मैं उन्हें अकसर देखती थी। उन्हें हमेशा ही अटेंशन और लाड़-प्यार चाहिए होता था।
मौसमी ने आगे कहा था कि, 'स्टारडम के बावजूद अमिताभ बच्चन ने जमीन से जुड़े रहना सीखा लेकि राजेश खन्ना इसमें नाकाम रहे। वह सफलता के नशे में चूर हो गए थे। कहते हैं ना कि एक अनपढ़ गुंडा और एक पढ़े लिखे गुंडे में बहुत फर्क होता है। दुख होता है कि इतनी सक्सेस देखने के बाद राजेश खन्ना बुरी तरह नीचे गिरे।

मैं हिंदी अच्छे से नहीं बोल पाती थीं
अपना एक किस्सा शेयर करते हुए मौसमी ने ये भी बताया, मैं हिंदी अच्छे से नहीं बोल पाती थीं क्योंकि मेरी पहली भाषा हिंदी नहीं थी। ऐसे में राजेश खन्ना मुझे गालियां देना सिखाते थे और खूब मजे लेते थे। वह हंसते थे क्योंकि मैं उन्हें यूं ही बोल देती थी। मैं भोली थी। मुझे उनका मतलब नहीं पता था। बता दें कि मौसमी चटर्जी ने साल 1967 में फिल्म 'बालिका वधू' से एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। उस वक्त वह बच्ची ही थीं। फिल्म सुपरहिट रही और उसके बाद फिल्मों की लाइन लग गई। एक समय वह महंगी एक्ट्रेस में शामिल हो गई थी।