26 FEBTHURSDAY2026 1:45:20 PM
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नहाते वक्त यूरिन की आदत  सही या गलत? प्रेमानंद महाराज ने बताया सच

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 26 Feb, 2026 11:43 AM
नहाते वक्त यूरिन की आदत  सही या गलत? प्रेमानंद महाराज ने बताया सच

नारी डेस्क:  नहाते समय पेशाब (यूरिन) आ जाना कई लोगों के लिए आम बात है। कुछ लोग इसे शरीर की सामान्य प्रक्रिया मानते हैं और इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। लेकिन हाल ही में आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज ने इस विषय पर विस्तार से बात की, जिसके बाद यह चर्चा का विषय बन गया है। आइए   समझते हैं कि इस बारे में आध्यात्मिक और मेडिकल दृष्टिकोण क्या कहता है।

आध्यात्मिक नजरिए से क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज?

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जब व्यक्ति स्नान करता है तो उसका शरीर और मन एक रिलैक्स अवस्था में पहुंच जाता है। पानी का स्पर्श दिमाग को शांत करता है और शरीर के अंदर जमा तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। उनका मानना है कि इस समय शरीर का आंतरिक दबाव भी कम होता है। यही कारण है कि कई बार नहाते समय यूरिन की इच्छा महसूस होती है। इसे वे शरीर और मन के आपसी संबंध की एक प्रक्रिया बताते हैं। उनके अनुसार, स्नान केवल बाहरी सफाई नहीं है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक शुद्धि का भी माध्यम है।

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मेडिकल एक्सपर्ट्स की क्या है राय?

वहीं अगर डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों की बात करें, तो उनका नजरिया थोड़ा अलग है। खासकर OB-GYN (महिला रोग विशेषज्ञ) का कहना है कि शॉवर में खड़े होकर पेशाब करना, खासकर महिलाओं के लिए, भविष्य में समस्याएं पैदा कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, खड़े होकर पेशाब करना शरीर की प्राकृतिक स्थिति नहीं है। इससे मूत्राशय (ब्लैडर) पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। समय के साथ यह आदत पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को कमजोर कर सकती है।

इसके अलावा एक और मनोवैज्ञानिक कारण भी बताया जाता है। जब कोई व्यक्ति बार-बार बहते पानी की आवाज के साथ पेशाब करता है तो दिमाग में एक तरह की कंडीशनिंग बन जाती है। यानी पानी की आवाज सुनते ही ब्लैडर को खाली करने का संकेत मिलने लगता है। आगे चलकर इससे अचानक तेज यूरिन की इच्छा या यूरिन लीकेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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हाइजीन और संक्रमण का खतरा

स्वच्छता भी एक बड़ा मुद्दा है। अगर बाथरूम साझा (शेयर) किया जाता है, तो फर्श पर मौजूद बैक्टीरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसे में यह आदत स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर यूरिनरी हेल्थ के लिए टॉयलेट में बैठकर पेशाब करना सबसे सुरक्षित और सही तरीका है।

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क्या करना चाहिए?

डॉक्टर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए केगेल एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं। अगर बार-बार यूरिन की तेज इच्छा, जलन या लीकेज जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। संक्षेप में कहें तो, नहाते समय पेशाब करना कुछ लोगों को सामान्य लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह आदत सेहत पर असर डाल सकती है। इसलिए सही जानकारी के आधार पर आदतों में सुधार करना ही बेहतर है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण इसे शरीर की रिलैक्स अवस्था से जोड़ता है, जबकि मेडिकल साइंस सावधानी बरतने की सलाह देता है। सेहत के लिहाज से बेहतर यही है कि पेशाब हमेशा सही और प्राकृतिक स्थिति में, यानी टॉयलेट में बैठकर किया जाए। छोटी-सी लापरवाही भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए जागरूक रहना जरूरी है।

   

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