
नारी डेस्क: राजस्थान में सीकर जिले के खाटूश्याम में विश्वविख्यात बाबा खाटूश्यामजी का आठ दिवसीय लक्खी फाल्गुन मेला शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरु हो गया। मुख्य मेला 27 फरवरी (फाल्गुन एकादशी) को आयोजित होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। पहले ही दिन ढाई लाख और दूसरे दिन करीब 4 लाख लोगों ने दर्शन किए। फाल्गुन मेले को दिव्य और आकर्षक बनाने के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिर के सिंहद्वार पर भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक प्रतिमा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

विशेष फूलों से सजा फूलों का दरबार
इस बार बाबा श्याम के दरबार को अलौकिक रूप से सजाया गया है। मंदिर परिसर और मुख्य द्वार पर की गई भव्य लाइटिंग और फूलों की सजावट भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। देश-विदेश से मंगाए गए विशेष फूलों से बाबा का श्रृंगार किया गया है, जिसकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु घंटों कतारों में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे। इस बार 120 बंगाली कारीगरों द्वारा भव्य सजावट कराई गई है।

देश भर से आ रहे श्रद्धालु
परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु बाबा श्याम के साथ सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। : बाबा के दरबार को 11,000 डमरुओं से सजाया गया है. मुख्य द्वार पर 20 फीट ऊंचा एक विशाल डमरू और हाथी का शिरोभाग हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। देश भर से आने वाले श्रद्धालु रींगस डाइवर्जन, चारण मेला मैदान, लखदातार मैदान और 40 फीट नवीन मार्ग से होकर सुगमता से बाबा श्याम के दरबार में पहुंच रहे हैं। राजस्थान पुलिस, प्रशासन और मंदिर कमेटी ने दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

भक्तों में उत्साह का माहौल
मेले के दौरान त्वरित सहायता के लिए पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 के साथ ही मोबाइल नंबर 9667600788 जारी किया गया है। दोनों हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय रहेंगी। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 12 पुलिस सहायता बूथ स्थापित किए गए हैं जहां से मार्गदर्शन एवं सुरक्षा संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फाल्गुन मेले के शुरु होते ही जहां एक ओर भक्ति और उत्साह का माहौल है वहीं प्रशासन और पुलिस की सतकर् व्यवस्था श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का भरोसा दिला रही है। खाटूधाम में इस समय श्रद्धा, भव्यता और अनुशासन का अछ्वुत संगम देखने को मिल रहा है।