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क्या होती है Blue Mind थेरेपी? जिससे दिमाग हो जाता एकदम ताजा

  • Edited By Monika,
  • Updated: 28 Feb, 2026 08:21 PM
क्या होती है Blue Mind थेरेपी? जिससे दिमाग हो जाता एकदम ताजा

नारी डेस्क : समंदर सिर्फ एक खूबसूरत नज़ारा नहीं है, बल्कि एक एहसास है जो दिमाग को ठहरना सिखाता है। लहरों की आवाज़, पानी का बहाव या बारिश की बूंदें ये सब मिलकर मन को अपने आप शांत कर देती हैं। इसी एहसास को साइंस की भाषा में “ब्लू माइंड थेरेपी” कहा जाता है। जब इंसान पानी के पास होता है चाहे वह समंदर हो, नदी, झील या हल्की बारिश तो दिमाग धीरे-धीरे रिलैक्स मोड में चला जाता है। यही कारण है कि पानी के पास बिताए गए छोटे-छोटे पल भी मन को रीसेट कर देते हैं। अगर बाहर जाना संभव न हो, तो घर में रखा छोटा फाउंटेन, एक्वेरियम या मोबाइल पर लहरों की आवाज़ सुनना भी वही सुकून देता है। ब्लू माइंड थेरेपी बताती है कि सुकून हमेशा बड़ी छुट्टियों से नहीं, बल्कि ऐसे ही सरल अनुभवों से मिलता है।

क्या है ब्लू माइंड और रेड माइंड?

ब्लू माइंड दिमाग की वह स्थिति है, जिसमें शांति, फोकस और क्रिएटिविटी बढ़ती है। इस दौरान ब्रेन में अल्फा वेव्स एक्टिव होती हैं और सेरोटोनिन व डोपामाइन जैसे फील-गुड केमिकल्स बढ़ते हैं। इसके उलट होता है रेड माइंड, जिसमें तनाव, जल्दबाज़ी और ओवर-थिंकिंग हावी रहती है। लगातार स्क्रीन, शोर और भागदौड़ दिमाग को इसी रेड मोड में रखती है, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और फोकस की कमी महसूस होती है। ब्लू माइंड थेरेपी हमें इसी तनाव भरे रेड माइंड से बाहर निकालने का रास्ता दिखाती है।

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शरीर पर भी पड़ता है असर

जब दिमाग ब्लू मोड में जाता है, तो सिर्फ मूड ही नहीं, शरीर भी शांत होने लगता है।
दिल की धड़कन सामान्य रहती है
ब्लड प्रेशर संतुलित होता है
नींद गहरी आती है
दिमाग में स्पष्टता बढ़ती है
पानी के पास रहने से इंसान वर्तमान पल को महसूस करना सीखता है, जो आज के तनावभरे जीवन में बेहद जरूरी है। 
खासतौर पर तब, जब भारत में युवा वर्ग बुजुर्गों की तुलना में तीन गुना ज्यादा तनाव में जी रहा है।

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ब्लू माइंड थेरेपी के फायदे

मानसिक शांति और तनाव में कमी

समंदर, नदी या झील को देखते ही दिमाग हाइपर-अलर्ट मोड से बाहर आ जाता है। इसे सॉफ्ट फॅसिनेशन कहा जाता है, जो मानसिक थकान कम करता है और तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल को घटाता है।

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रचनात्मकता (Creativity) में बढ़ोतरी

लगातार स्क्रीन और शोर-शराबे से सोचने की क्षमता दब जाती है। पानी के पास रहने से दिमाग को डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क में जाने का मौका मिलता है, जिससे नए विचार और क्रिएटिव सोच जन्म लेती है।

बेहतर नींद और शारीरिक स्वास्थ्य

लहरों की आवाज़ एक तरह का व्हाइट नॉइज़ होती है, जो दिमाग को शांत कर गहरी नींद लाने में मदद करती है। साथ ही पानी के पास मौजूद नकारात्मक आयन शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर मूड को बेहतर बनाते हैं।

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माइंडफुलनेस और ध्यान

पानी की गति और उसकी मधुर ध्वनि हमें बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के वर्तमान क्षण में रहने की अनुभूति कराती है। लहरों का बहाव, बारिश की बूंदों की आवाज़ या झील की शांति दिमाग को अपने आप स्थिर कर देती है, जिससे मन भटकने के बजाय ठहरना सीखता है। यही कारण है कि इसे माइंडफुलनेस और ध्यान का सबसे नेचुरल व आसान तरीका माना जाता है।

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ब्लू माइंड थेरेपी कोई महंगी या जटिल प्रक्रिया नहीं है। कभी समंदर के किनारे बैठना, कभी बारिश में टहलना, या बस लहरों की आवाज़ सुन लेना यही इसकी असली ताकत है। क्योंकि कभी-कभी सबसे बड़ी थेरेपी बस एक लहर होती है।
 

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