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पीठ दर्द का आपके ब्रेन से है गहरा कनेक्शन, दवाओं से ज्यादा दिमाग पर दें ध्यान

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 06 Mar, 2026 01:05 PM
पीठ दर्द का आपके ब्रेन से है गहरा कनेक्शन, दवाओं से ज्यादा दिमाग पर दें ध्यान

नारी डेस्क: एक नई स्टडी के अनुसार क्रॉनिक बैक पेन (लंबे समय तक रहने वाला कमर दर्द) को समझने का नजरिया बदलने से मरीजों को जल्दी राहत मिल सकती है। अमेरिका के कोलोराडो विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने जर्मनी के हैम्बर्ग-एप्पेंडॉर्फ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ एक अध्ययन किया है, जिसमें पाया गया कि कई मामलों में यह दर्द केवल मांसपेशियों या हड्डियों की समस्या नहीं होता, बल्कि इसका संबंध दिमाग (ब्रेन) से भी होता है।

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क्रॉनिक बैक पेन क्या है?

जब कमर का दर्द तीन महीने या उससे ज्यादा समय तक बना रहता है तो उसे क्रॉनिक बैक पेन कहा जाता है। आमतौर पर लोग इसे रीढ़ की हड्डी, डिस्क या मांसपेशियों की समस्या मानते हैं। लेकिन नई स्टडी बताती है कि कई बार दर्द का कारण शरीर में नहीं बल्कि दिमाग की दर्द को महसूस करने की प्रक्रिया से जुड़ा होता है। शोध के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक दर्द रहता है तो दिमाग उस दर्द के संकेतों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। इसका मतलब यह है किदिमाग दर्द के सिग्नल को ज्यादा तेज या बार-बार महसूस कर सकता है। 


दिमाग का वॉल्यूम बटन 

विशेषज्ञों ने पाया कि जिन्हें पीठ दर्द था, उन्हें आम शोर-शराबा भी असहनीय लग रहा था। उनके दिमाग का एमआरआई स्कैन किया गया, तो वजह सामने आई। जब पीठ दर्द पुराना हो जाता है, तो शरीर के ऊतक ठीक होने के बावजूद दर्द के सिग्नल भेजते रहते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्सर पुराने पीठ दर्द वाले मरीजों को कहा जाता है कि उनकी रिपोर्ट सामान्य है और उन्हें कोई समस्या नहीं है। यह अध्ययन बताता है कि समस्या असली है, लेकिन यह पीठ में नहीं, बल्कि दिमाग में है। दिमाग के सर्किट को सही तरीके से प्रशिक्षित करके इस पुराने दर्द और आवाज या संवेदनशीलता की ज्यादा प्रतिक्रिया से राहत पाई जा सकती है।

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समझ बदलने से मिल सकती है जल्दी राहत

स्टडी में पाया गया कि जब मरीजों को यह समझाया गया कि उनका दर्द दिमाग की प्रक्रिया से भी जुड़ा हो सकता है, तो कई लोगों में दर्द जल्दी कम होने लगा। इससे उनका डर और तनाव कम हुआ, जो अक्सर दर्द को और बढ़ा देता है। सही जानकारी मिलने से मरीज अपने दर्द को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रॉनिक बैक पेन के इलाज में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय कुछ और तरीके भी मददगार हो सकते हैं, जैसे फिजियोथेरेपी और हल्की एक्सरसाइज, तनाव कम करने की तकनीकें माइंडफुलनेस और काउंसलिंग
 नियमित गतिविधि और सही पोस्टर बनाए रखना


इस बात का रखें ख्याल

इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने पेन रिप्रोसेसिंग थेरेपी का इस्तेमाल किया। इस मनोवैज्ञानिक तरीके में मरीजों को यह समझाया जाता है कि पीठ में कोई खतरा नहीं है, बल्कि उनका दिमाग गलत सिग्नल दे रहा है। अगर मरीज और डॉक्टर इस बात को समझें, तो इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकता है और मरीजों को जल्दी राहत मिल सकती है।
 

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