नारी डेस्क: हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों, उनके अधिकारों और उनके स्वास्थ्य के महत्व को याद दिलाने का अवसर होता है। आमतौर पर महिलाएं घर और काम की जिम्मेदारियों को निभाने में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपनी सेहत पर ध्यान देना भूल जाती हैं। लेकिन जैसे ही किसी महिला की उम्र 30 साल के आसपास पहुंचती है, शरीर में कई तरह के हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव शुरू होने लगते हैं। इस उम्र के बाद कई बीमारियों का खतरा भी धीरे-धीरे बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो उनका इलाज आसान हो जाता है। इसलिए 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को कुछ जरूरी मेडिकल टेस्ट जरूर करवाने चाहिए।
सर्वाइकल कैंसर की जांच
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले गंभीर कैंसर में से एक है। यह गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होने वाला कैंसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लाखों महिलाएं इस बीमारी का शिकार होती हैं। 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को हर तीन साल में एक बार पैप स्मीयर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। कई मामलों में डॉक्टर HPV टेस्ट कराने की भी सलाह देते हैं। इन टेस्ट की मदद से सर्विक्स की कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलाव का पता शुरुआती चरण में ही चल जाता है, जिससे कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर की जांच
दुनियाभर में महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर ब्रेस्ट कैंसर है। अगर इसका पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो इलाज काफी आसान हो जाता है। 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित रूप से सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन यानी खुद से ब्रेस्ट की जांच करने की आदत डालनी चाहिए। अगर ब्रेस्ट में कोई गांठ, सूजन, दर्द या असामान्य बदलाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है, खासकर उन महिलाओं को जिनके परिवार में पहले किसी को ब्रेस्ट कैंसर रहा हो।
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल टेस्ट
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी और बदलती लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई महिलाएं काम और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण तनाव में रहती हैं और खानपान भी अनियमित हो जाता है। 30 साल के बाद समय-समय पर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कराना जरूरी है। इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा समय रहते पता चल सकता है। अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो यह टेस्ट और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।
थायराइड टेस्ट
थायराइड की समस्या महिलाओं में काफी आम होती है। यह शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। अगर किसी महिला को अचानक वजन बढ़ने या कम होने, बार-बार थकान महसूस होने, बाल झड़ने, मूड स्विंग्स या पीरियड्स में गड़बड़ी जैसी समस्या हो रही है, तो थायराइड फंक्शन टेस्ट कराना जरूरी होता है। नियमित जांच से थायराइड की समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है और उसका इलाज भी आसान हो जाता है।

हड्डियों की जांच
35 साल की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियों की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। अगर शरीर में कैल्शियम और विटामिन D की कमी हो जाए तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट करवाना फायदेमंद होता है। इससे हड्डियों की मजबूती का पता चलता है। जो महिलाएं लंबे समय तक बैठकर काम करती हैं या जिन्हें बार-बार फ्रैक्चर होने की समस्या रहती है, उन्हें यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
महिला दिवस पर खुद को दें सेहत का तोहफा
महिला दिवस सिर्फ महिलाओं के सम्मान का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन खुद की सेहत और खुशहाली पर ध्यान देने का भी मौका देता है। 30 साल के बाद महिलाओं के शरीर में कई बदलाव शुरू हो जाते हैं। ऐसे में समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना बहुत जरूरी है। पैप स्मीयर टेस्ट, ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और थायराइड टेस्ट जैसी जांचें महिलाओं को स्वस्थ जीवन जीने में मदद करती हैं।

अगर महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान रखेंगी, तो वे न सिर्फ खुद स्वस्थ रहेंगी बल्कि अपने परिवार के लिए भी मजबूत सहारा बन सकेंगी। इसलिए इस महिला दिवस पर खुद को सबसे खास तोहफा दें अपनी सेहत का ख्याल रखें और जरूरी हेल्थ टेस्ट जरूर कराएं।