नारी डेस्क : आज के समय में मेडिकल साइंस इतनी एडवांस हो चुकी है कि अब बच्चे के जन्म से पहले ही उसकी सेहत का पूरा आकलन किया जा सकता है। गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति, विकास और संभावित बीमारियों का पता लगाने के लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे Fetal Medicine कहा जाता है। यह तकनीक न केवल बच्चे की पहली “हेल्थ रिपोर्ट” तैयार करती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर गर्भ में ही इलाज की भी सुविधा देती है।
क्या है फीटल मेडिसिन?
Fetal Medicine, प्रसूति शास्त्र की एक विशेष शाखा है, जो गर्भ में पल रहे बच्चे (फीटस) के स्वास्थ्य और विकास की निगरानी करती है। इसे पेरिनाटोलॉजी भी कहा जाता है।

इस तकनीक के जरिए
बच्चे में किसी भी तरह की असामान्यता (Abnormalities) का पता लगाया जाता है
क्रोमोसोमल डिफेक्ट्स की स्क्रीनिंग होती है
जरूरत पड़ने पर भ्रूण सर्जरी भी की जा सकती है
स्टिलबर्थ के खतरे को कम करने की कोशिश की जाती है
दिल, किडनी या अन्य अंगों की समस्याओं को पहले ही पहचान लिया जाता है।
कैसे तैयार होती है बच्चे की पहली हेल्थ रिपोर्ट?
एडवांस्ड अल्ट्रासाउंड
एडवांस्ड अल्ट्रासाउंड के जरिए गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत की गहराई से जांच की जाती है। इसमें टार्गेटेड और लेवल-2 स्कैन शामिल होते हैं, जिनकी मदद से बच्चे के दिमाग, रीढ़ की हड्डी और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों का बारीकी से मूल्यांकन किया जाता है, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

जेनेटिक स्क्रीनिंग
जेनेटिक स्क्रीनिंग के तहत NIPT और डबल मार्कर जैसे टेस्ट किए जाते हैं, जिनमें मां के ब्लड सैंपल की जांच करके यह पता लगाया जाता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे में Down Syndrome या अन्य किसी क्रोमोसोमल समस्या का खतरा तो नहीं है।
फीटल इकोकार्डियोग्राफी
फीटल इकोकार्डियोग्राफी एक विशेष जांच है, जिसके माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चे के दिल की संरचना और उसकी धड़कन का विस्तार से मूल्यांकन किया जाता है, ताकि किसी भी प्रकार की हृदय संबंधी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
एनोमली स्कैन
एनोमली स्कैन प्रेग्नेंसी के लगभग पांचवें महीने में किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण परीक्षण है, जिसमें गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर के सभी अंगों के विकास का विस्तार से मूल्यांकन किया जाता है, ताकि किसी भी संरचनात्मक समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

किन महिलाओं को जरूर लेनी चाहिए सलाह?
इन परिस्थितियों में Fetal Medicine विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी होता है
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (जैसे Diabetes या High Blood Pressure)
35 साल से अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी
पहले प्रेग्नेंसी में बर्थ डिफेक्ट का इतिहास
जुड़वा या मल्टीपल प्रेग्नेंसी
मिर्गी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं।
फीटल मेडिसिन आज के समय की एक बेहद अहम और जीवन रक्षक तकनीक है। यह न सिर्फ गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत का सही आकलन करती है, बल्कि समय रहते इलाज की राह भी दिखाती है। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान सही समय पर जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी है।