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इस राज्य में क्यों होंगे Pregnant महिलाओं के पतियों के HIV और सिफलिस टेस्ट

  • Edited By Monika,
  • Updated: 05 Apr, 2026 03:36 PM
इस राज्य में क्यों होंगे Pregnant महिलाओं के पतियों के HIV और सिफलिस टेस्ट

नारी डेस्क : गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए Haryana सरकार एक अहम नीति लाने की तैयारी में है। इस नई पॉलिसी के तहत अब प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ-साथ उनके पतियों का भी HIV और Syphilis टेस्ट अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से मां से बच्चे में संक्रमण फैलने के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। फिलहाल इस नीति का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश संबंधित विभागों को दे दिए गए हैं और जल्द ही इसे लागू किया जा सकता है।

कैसे और कहां लिया गया यह बड़ा फैसला?

यह निर्णय Haryana State AIDS Control Society की 23वीं वर्किंग कमेटी की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डॉ. सुमिता मिश्रा ने की। इस दौरान कामकाजी महिलाओं के लिए HIV एड्स कार्यस्थल नीति लागू करने और प्रेग्नेंट महिलाओं के पतियों के टेस्ट को इसमें शामिल करने पर सहमति बनी।

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क्यों करवाया जा रहा टेस्ट

इस नीति का मुख्य उद्देश्य HIV और Syphilis जैसी बीमारियों को गर्भवती महिला से उसके बच्चे तक पहुंचने से रोकना है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और इलाज से इन संक्रमणों को नियंत्रित किया जा सकता है। National AIDS Control Organization ने हरियाणा के लिए इस वर्ष लगभग 5.95 लाख HIV और सिफलिस टेस्ट का लक्ष्य तय किया है। वहीं, भविष्य में हर साल करीब 12 लाख टेस्ट करने की योजना बनाई गई है।

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नई लैब और डिजिटल मॉनिटरिंग

सरकार ने पंचकूला में नई HIV वायरल लोड लैब स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही संक्रमित मरीजों के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किया जाएगा, जिसके जरिए उन्हें वॉइस मैसेज, अलर्ट और ट्रीटमेंट रिमाइंडर भेजे जाएंगे।

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क्या है HIV और सिफलिस?

HIV एक वायरस है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है और आगे चलकर AIDS का कारण बन सकता है। Syphilis एक गंभीर यौन संचारित संक्रमण है, जो बैक्टीरिया से फैलता है और समय पर इलाज न होने पर खतरनाक हो सकता है।

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हरियाणा सरकार की यह पहल मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। समय पर जांच और जागरूकता से इन बीमारियों के प्रसार को रोका जा सकता है और स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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