नारी डेस्क: हाल ही में आईसीएमआर (ICMR) द्वारा की गई एक स्टडी में सामने आया है कि भारत में लगातार बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर के मामलों के पीछे मुख्य वजह नींद की कमी, तनाव और पेट के आसपास मोटापा है। अध्ययन के अनुसार, देश में हर साल लगभग 50 हजार नए ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आ सकते हैं, और यह संख्या हर साल 5.6% की दर से बढ़ेगी।
ब्रेस्ट कैंसर क्या है?
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे कॉमन कैंसर में से एक है। इसमें ब्रेस्ट की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बन जाता है। यदि इसका इलाज शुरुआती स्टेज में न किया जाए तो यह जानलेवा हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों में पेट दर्द, ब्रेस्ट में गांठ, कमजोरी और थकान शामिल हैं।

ICMR की स्टडी में क्या सामने आया?
आईसीएमआर–नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च द्वारा किए गए अध्ययन में 1,900 शोध पत्रों की समीक्षा के बाद 31 प्रमुख स्टडीज को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि नींद में कमी और उच्च स्तर का तनाव ब्रेस्ट कैंसर के मुख्य कारण हैं। खासकर पेट के आसपास का मोटापा (सेंट्रल ओबेसिटी) महिलाओं में जोखिम बढ़ाता है। जिन महिलाओं का कमर-से-कूल्हे का अनुपात 0.85 या उससे अधिक था, उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना अधिक थी।
फैमिली हिस्ट्री भी एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।
लगातार शारीरिक रूप से एक्टिव रहना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम कर सकता है।
नई उम्मीद: नैनोटेक्नोलॉजी आधारित दवा
अच्छी खबर यह है कि ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में नई नैनोटेक्नोलॉजी आधारित दवा विकसित की गई है। IIT मद्रास और ऑस्ट्रेलिया की मोनाश और डीकिन यूनिवर्सिटी ने मिलकर इसे बनाया है। इस तकनीक में एंटी-कैंसर दवा डॉक्सोरुबिसिन को नैनो-बबल्स में पैक किया जाता है। फिर एक सूक्ष्म सुई और सिलिकॉन ट्यूब की मदद से इसे सीधे कैंसर कोशिकाओं में पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं होता। IIT मद्रास की सहायक प्रोफेसर डॉ. स्वाथी सुधाकर के अनुसार, लैब टेस्ट में इस दवा ने कैंसर कोशिकाओं की बढ़त को रोकने के साथ ही ट्यूमर के लिए नए ब्लड वेसल्स बनने की प्रक्रिया भी रोक दी।

ब्रेस्ट कैंसर का इलाज
ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में मुख्य रूप से कीमोथेरेपी और रेडिएशन का इस्तेमाल होता है। लेकिन इन विधियों में दवा पूरे शरीर में फैलती है, जिससे स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान होता है और कई साइड इफेक्ट्स सामने आते हैं। नैनोटेक ड्रग डिलीवरी तकनीक की वजह से दवा 23 गुना अधिक प्रभावी साबित हुई है। कम मात्रा में भी यह दवा ज्यादा असर दिखा रही है और भविष्य में इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह तकनीक क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए भी उपयुक्त मानी जा रही है।
कैसे बचें ब्रेस्ट कैंसर से?
पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस कम करने की कोशिश करें।
पेट और कमर के आसपास वजन नियंत्रण में रखें।
नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि अपनाएं।
संतुलित और हेल्दी डायट लें।
परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की इतिहास होने पर नियमित जांच करवाएं।

इस स्टडी और नैनोटेक दवा के विकास से यह स्पष्ट हो गया है कि सही जीवनशैली और नई तकनीक दोनों मिलकर ब्रेस्ट कैंसर को रोकने और इलाज करने में मदद कर सकती हैं।