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यहां 'बड़े हनुमान जी' के दर्शन कर बेऔलादों के घर गूंजती हैं किलकारियां

  • Edited By Sunita Rajput,
  • Updated: 31 Jan, 2020 11:39 AM
यहां 'बड़े हनुमान जी' के दर्शन कर बेऔलादों के घर गूंजती हैं किलकारियां

हर कोई घूमने-फिरने का अपना अलग शौंक रखता है। किसी व्यक्ति को पहाड़ और वादियों में जाकर अच्छा महसूस होता है तो कुछ ऐसे भी परिवार हैं, जो अपनी छुट्टियां किसी धार्मिक स्थल पर जाकर मनाना पसंद करते हैं। अगर आप और आपके बच्चे भी कुछ ऐसा ही शौंक रखते हैं तो आज हम आपको अमृतसर के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां जाकर केवल आपको आत्मिक शांति ही नहीं महससू होगी बल्कि आपकी हर मुराद भी पूरी होगी...

बड़ा हनुमान मंदिर

यह बड़ा हनुमान मंदिर अमृतसर में स्थित है। यहां बाबा जी का स्वरूप बैठे हनुमान जी के रूप में है। भारत में बैठे हनुमान जी केवल 2 जगह पाए जाते है। एक तो अयोध्या हनुमान गढ़ी में और दूसरे अमृतसर में विराजमान है। 

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क्या है इतिहास?

मान्यता है रामायण काल में लव-कुश ने हनुमान जी को यही पर बांधा था। रामायण काल में लव-कुश ने उन्हें यहां के बटुक वृक्ष पर बांधा था। कहा जाता है कि जिस अवस्था में उन्हें बांधा गया था उसी अवस्था में बाबा जी प्रकट हुए थे। साथ ही जब हनुमान जी को लव कुश ने छोड़ा था तो उन्होंने खुश होकर वरदान देते हुए कहा कि जिस रूप में मैंने हार मानी है वही प्राप्ति हो। जिन महिलाओं को बच्चा नहीं होता खासतौर पर जो पुत्र की कामना रखती है वे इसी वृक्ष पर मौली या धागा बांधती है। उन्हें फिर बाबा जी की कृपा से संतान की प्राप्ति होती है। 

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क्या चढ़ाया जाता है?

यहां सिंदुर और घी का चोला चढ़ता है। वैसे तो बाकि हनुमान जी के मंदिरों में चमेली और सिंदूर चढ़ता है पर यहां विशेष रूप से सिंदुर और घी चढ़ता है। यह सोमवार और शनिवार की रात को ही चढ़ता है। कपड़े का चोला हर रोज बाबा जी का बदला जाता है। 

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मन्नत पूरी होने पर लोग क्या करते है?

जिन महिलाओं की मन्नत पूरी हो जाती है। वे अपनी मन्नत उतारने के लिए यहां पर दशहरे वाले नवरात्रों में पुत्र को लंगूर बनाती है। लंगुर बनाने के लिए मुख्य रूप से बच्चे की उम्र 1 या 3 साल यानि औड नंबर में होनी चाहिए। इसमें विशेष तौर पर लाल रंग का जरी का कपड़ा होता है उसकी ड्रैस पूरे 10 पहन कर बच्चा सुबह शाम बाबा जी के मंदिर में माथा टेकता है। साथ ही उसके माता-पिता भी माथा टेकते है।

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कितना पुराना है मंदिर?

माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 1100 साल पुराना है। दशहरे वाले नवरात्रों में यहां हर साल बहुत भारी मेला लगता है। जिसमें लगभग 5 से 7 हजार बच्चे लंगूर बनते है। 

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कारोबार से जुड़ी मान्यताएं

किसी का भी कोई रूका-फंसा काम हो, कोई मनोकामना हो बाबा जी के वृक्ष पर मौली बांधने और दर्शन करने से पूरी होती है और उन पर बाबा जी की कृपा सदा बनी रहती है।

शादी

लोग यहां जल्द शादी होने की भी मन्नत लेकर आते है। उनकी यह मनोकामना 40 दिनों तक बाबा जी के मंदिर में दर्शन करने, उनको चोला और सिंदुर चढ़ाने से पूरी होती है। 

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जैसे कि मान्यता है कि कलयुग में हनुमान जी साक्षात है और अगर आप उन्हें सच्चे दिल से बुलाएगे, उनसे बात करना चाहेंगे तो वो आपकी बात जरूर सुनेंगे। साथ ही आपकी मनोकामना भी पूर्ण करेंगे।

 

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