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शौंक से आगे बढ़कर शुरू किया बिजनेस, अब विदेशों में भी कोंग के अचार की डिमांग

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 05 Nov, 2020 04:03 PM
शौंक से आगे बढ़कर शुरू किया बिजनेस, अब विदेशों में भी कोंग के अचार की डिमांग

हमारे समाज में धारणा बनी हुई है कि हाउसवाइफ सिर्फ खाना बनाने के लिए बनी है। ऐसी ही दकियानूसी सोच को तोड़ करोड़ों महिलाओं को प्रेरणा दे रही मेघालय के शिलांग की रहने वाली कोंग फिकारालिन वानशोंग, जो अपने एक शौक से लाखों का बिजनेस खड़ा कर डाला। शिलांग के पोह्क्सेह गांव की रहने वाली कोंग पिछले एक दशक से फूड प्रोसेसिंग यूनिट चला रही है और इतने कम समय में उन्होंने विदेशी मार्केट में भी अपनी जगह बना ली है। यही नहीं, फूड प्रोसेसिंग के बाद उन्होंने बेकरी में भी अपना हाथ अजमाया और उसमें भी सफलता हासिल की।

शौक को बनाया बिजनेस

'कोंग कारा' नाम से फेमस इस महिला को साल 2010 में 'सर्वश्रेष्ठ उद्यमी पुरुस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि वह हमेशा से ही अपनी मां को तरह-तरह के अचार बनाती देखती थी। वहीं, उनके पापा को घर में ही फूल, फल-सब्जियां उगाने का शौक थी, जहां से सब्जियां लेकर उनकी मां अचार बनाकर रिश्तेदारों व पड़ोसियों में बांट देती थी। एक बार कोंग ने पड़ोस की एक महिला को फलों से स्क्वेश बनाते देखा तो उन्हें फूड प्रोसेसिंग का आइडिया आया। फिर क्या... उन्होंने अपनी सोच को एक बिजनेस का रूप दे दिया।

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ट्रेनिंग लेकर निखारी स्किल्स

इसके लिए उन्होंने 12वीं कक्षा के बाद से डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन से 2 हफ्ते की ट्रेनिंग भी ली। यहां उन्हें बहुत-सी नई चीजों और स्वाद के साथ पोषण का ख्याल रखने के बारे में जाना। इसके बाद उन्होंने घर पर 5 साल तक अपनी स्किल्स को निखारा। इसके बाद उन्होंने जैम, स्क्वेश जैसी चीजें बनाने की ट्रेनिंग ली।

शुरू की 'कारा फ्रेश फूड्स' फूड प्रोसेसिंग

2005 में कोंग ने शिलांग में हो रहे एक फूड फेस्टिवल में स्टॉल लगाया, जहां उनके प्रोडक्ट्स की खूब ब्रिकी हुई। उन्होंने सोचा भी नहीं कि कोई उनकी बनाई चीजें खरीदेगा। शुरूआत में उन्होंने बैंबू शूट और मिर्च का अचार बेचा। तब लोगों ने उनके पूछा कि क्या वह कमर्शियल लेवल पर अचार बेचती है और लोग उसे कैसे खरीद सकते हैं। यहीं से उन्हें फूड्स प्रोसेसिंग बिजनेस करने का ख्याल आया। शुरूआत में उन्हें लगा कि वो बिजनेस को कैसे संभालेगी, जिसके बाद वह 2006 में एक फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के साथ जुड़ी। एक साल की ट्रेनिंग के बाद उन्होंने खुद की प्रोसेसिंग यूनिट शुरू कर ली, जिसका नाम 'कारा फ्रेश फूड्स' रखा गया।

महिलाओं को दिया रोजगार

उन्होंने इसकी शुरूआत अपनी किचन से की, जहां से अचार बनाकर वो शहरों में बेचने लगे। इसके साथ ही वह स्टॉल भी लगाती रही, जिसके जरिए उन्हें ग्राहकों से सीधे ऑर्डर मिलने शुरू हुए। थोड़ी-बहुत परेशानियों के बाद उनकी यूनिट सेटअप हो गई। अब वह अपनी यूनिट में बहुत से लोगों को काम देने के साथ महिलाओं को ट्रेनिंग भी देती हैं। यहीं नहीं, युवा छात्र उनकी कंपनी से ट्रेनिंग लेने के लिए भी आते हैं।

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विदेशों से भी आते हैं कोंग को ऑर्डर

यही नहीं, कोंग मेघायल के अलग-अलग डिपार्टमेंट के साथ मिलकर फूड प्रोसेसिंग के करीब 30 ट्रेनिंग सेशन कर चुकी हैं। इसके अलावा वह स्थानीय बाजारों में किसानों से रॉ मेटेरियल भी लेती हैं। अब वह बैंबू और लाल व हरी मिर्च ही नहीं, कटहल, हल्दी, मशरूम जैसे अचार और अननास, पैशन फ्रूट आदि के स्क्वेश आदि भी बनाती हैं। उनके प्रोडक्ट्स शिलांग के 20 फूड स्टोर तक जाते हैं। उन्हें भारत के अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया से महीने में करीब 500 ऑर्डर आ जाते हैं।

बेकरी का काम भी किया शुरु

अपने प्रोडक्ट्स प्रमोशन के लिए कोंग दिल्ली की एक प्रदर्शनी में भी हिस्सा ले चुकी हैं। हालांकि उनका बेकरी बिजनेस अभी बड़े लेवल पर सेटअप नहीं हुआ है। ग्राहकों की डिमांड पर वह सिर्फ पेस्ट्रीज, केक, पफ, ब्रेड, लेमन पाई आदि बनाती है। आज वह सालभर में करीब 6 लाख रुपए कमा लेती हैं और उनका नाम सफल उद्यमियों की लिस्ट में शामिल है। 4 बच्चों की परवरिश करते हुए उन्होंने जिस तरह इतना बड़ा बिजनेस खड़ा कर लिया वह वाकई काबिले तारीफ है। हालांकि इसमें उन्हें अपने परिवार का भी पूरा सहयोग मिला।

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प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग के चलते फिलहाल उनका फोकस अपनी फूड प्रोसेसिंग को बड़ा करना है। उनका कहना है कि महिलाओं को हमेशा धैर्य और आत्मविश्वास रखना चाहिए क्योंकि चुनौतियां व असफलताएं कितनी भी हो लेकिन आपकी कड़ी मेहनत और खुद पर भरोसा सफलता जरूर दिलाएगी

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