नारी डेस्क: आज की बदलती लाइफस्टाइल और गलत दिनचर्या की वजह से कई ऐसी बीमारियां हो रही हैं, जिनके बारे में लोगों को समय पर पता ही नहीं चल पाता। ऐसी ही एक गंभीर लेकिन आम बीमारी है स्लीप एपनिया, जिसमें सोते समय बार-बार सांस रुक जाती है।
क्या है स्लीप एपनिया?
स्लीप एपनिया एक नींद से जुड़ी बीमारी है, जिसमें सोते वक्त सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है या बहुत धीमी हो जाती है। यह समस्या एक रात में कई बार हो सकती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिसका सीधा असर दिल, दिमाग और दूसरे जरूरी अंगों पर पड़ता है। ऑक्सीजन की कमी से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा यह बीमारी याददाश्त कमजोर करने, ध्यान लगाने में दिक्कत और दिनभर थकान का कारण भी बनती है।

स्लीप एपनिया के मुख्य लक्षण
अगर समय रहते इसके लक्षण पहचान लिए जाएं, तो इलाज आसान हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं
तेज और लगातार खर्राटे लेना
दिन में जरूरत से ज्यादा नींद आना
इसके अलावा कुछ और लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे
सुबह उठते ही सिरदर्द
दिनभर थकान या सुस्ती
याददाश्त और एकाग्रता कमजोर होना
नींद से उठते समय गला सूखा या खराश महसूस होना
दिल की धड़कन अनियमित होना या हाई बीपी की समस्या

स्लीप एपनिया की जांच कैसे होती है?
स्लीप एपनिया की पुष्टि के लिए पॉलीसोमनोग्राफी (Sleep Study) की जाती है। यह जांच नींद के दौरान होती है, जिसमें शरीर पर लगे सेंसर सांस लेने का पैटर्न, ऑक्सीजन लेवल और नींद की गहराई को रिकॉर्ड करते हैं। अब यह जांच घर पर भी करवाई जा सकती है, जो अस्पताल की तुलना में सस्ती और सुविधाजनक होती है। कई जगहों पर इसकी लागत लगभग 500 रुपये से शुरू हो जाती है।
स्लीप एपनिया का इलाज
इलाज बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है। इसके प्रमुख इलाज हैं
CPAP मशीन: यह मशीन सांस की नली को खुला रखती है और सबसे असरदार इलाज मानी जाती है
वजन कम करना
ओरल डिवाइस (मुंह में लगाने वाले उपकरण)
कुछ मामलों में सर्जरी

भोपाल में 32% लोग स्लीप एपनिया से पीड़ित
एम्स भोपाल और आईसीएमआर की एक संयुक्त स्टडी में सामने आया है कि मध्य प्रदेश में करीब 32 प्रतिशत लोग स्लीप एपनिया या नींद से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस रिसर्च में 15 से 60 साल की उम्र के 1080 लोगों को शामिल किया गया था। स्टडी में यह भी पाया गया कि इनमें से 66 प्रतिशत लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे, और सबसे ज्यादा प्रभावित लोग 50 साल से ऊपर की उम्र के थे।
एक्सपर्ट की सलाह
खर्राटों और स्लीप एपनिया से जूझ रहे लोगों को एक आसान सलाह दी है। उनका कहना है कि पीठ के बल सोने से बचें करवट लेकर (साइड में) सोने की आदत डालें इससे न सिर्फ खर्राटे कम होते हैं, बल्कि हल्के और मध्यम स्तर के स्लीप एपनिया में भी काफी राहत मिल सकती है।