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Nari

इस गांव में लकड़ी नहीं चांदी- सोने के बनाएं जातै हैं होलिका और प्रहलाद

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 28 Feb, 2026 05:23 PM
इस गांव में लकड़ी नहीं चांदी- सोने के बनाएं जातै हैं होलिका और प्रहलाद

नारी डेस्क:  राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के हरणी गांव में होलिका दहन का त्योहार पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते मनाया जाता है, यहां पिछले 70 वर्षों से लकड़ी की होली जलाने की परंपरा को त्यागकर सोने-चांदी की भक्त प्रह्लाद और होलिका की पूजा की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब सात दशक पहले गांव में होली के लिए पेड़ काटने को लेकर गहरा विवाद हुआ था, जिसके बाद तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गयी थी। 
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इस घटना के बाद ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि भविष्य में होली के लिए न तो पेड़ काटे जाएंगे और न ही लकड़ी का दहन किया जाएगा।  इसी संकल्प के फलस्वरूप ग्रामीणों ने करीब 250 ग्राम चांदी की होलिका और सोने की भक्त प्रह्लाद की प्रतिमा बनवायी। परंपरा के अनुसार, होली के दिन इन बहुमूल्य विग्रहों का विशेष श्रृंगार किया जाता है। चांदी की होलिका की गोद में सोने के प्रह्लाद को बैठाकर उन्हें थाली में सजाया जाता है। इसके बाद ढोल-धमाकों और गाजे-बाजे के साथ पूरे गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। 
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शोभायात्रा निर्धारित स्थल पर पहुंचती है, जहां विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ प्रतीकात्मक पूजा संपन्न कराई जाती है। पूजन के पश्चात इन प्रतिमाओं को पुन: सुरक्षित रूप से चारभुजा मंदिर में पहुंचा दिया जाता है। ग्रामीण प्रह्लाद ने बताया कि इस परंपरा से प्रकृति का दोहन रुक गया है। यह व्यवस्था न होती, तो गांव में कई स्थानों पर होली जलाई जाती, जिससे भारी मात्रा में लकड़ियों की खपत होती। हरणी गांव की यह पहल वर्तमान दौर में हरित होली'और आस्था के अछ्वुत संगम का जीवंत उदाहरण पेश कर रही है। 

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