नारी डेस्क : देश और दुनिया में कैंसर आज सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारियों में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह शुरुआती दौर में अक्सर पहचान में नहीं आता। लेकिन अगर व्यक्ति समय रहते शरीर के संकेतों को समझ ले, तो इस बीमारी से बचाव और इलाज दोनों संभव हैं। कान का कैंसर भी ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षणों को लोग अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपके कान से बार-बार पानी, खून या बदबूदार मैल निकल रहा है, कान में दर्द या सुनने में दिक्कत हो रही है, तो यह केवल इन्फेक्शन नहीं बल्कि किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
क्या होता है कान का कैंसर?
कान का कैंसर एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक बीमारी है, जिसमें कैंसर कोशिकाएं कान के अंदर, बाहर या दोनों जगह विकसित हो सकती हैं। यह कैंसर आमतौर पर कान की बाहरी त्वचा, कान की नली या कान के पर्दे के आसपास शुरू होता है। मेडिकल भाषा में इसे स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous Cell Carcinoma) कहा जाता है। यह कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह दिमाग और आसपास के अंगों तक फैल सकता है, जिससे यह जानलेवा बन सकता है।

कान का कैंसर कहां से शुरू होता है?
कान का कैंसर आमतौर पर इन हिस्सों से शुरू हो सकता है।
कान की बाहरी त्वचा और कान की नली (Ear Canal)
कान का पर्दा और आसपास की हड्डियां।
कान में पाए जाने वाले कैंसर के प्रकार
स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous cell carcinoma) (सबसे आम)
बेसल सेल कार्सिनोमा (Basal cell carcinoma)
एडेनोइड सिस्टिक कार्सिनोमा (Adenoid cystic carcinoma)
मेलेनोमा और एडेनोकार्सिनोमा। (Melanoma and Adenocarcinoma)

कान के कैंसर के 7 शुरुआती और गंभीर लक्षण (Symptoms of Ear Cancer)
कान से खून, पानी या मवाद निकलना: अगर बिना किसी चोट के कान से बार-बार खून, पानी या बदबूदार तरल निकल रहा है, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है।
सुनने में कमी या कान बंद होना: अगर कान बार-बार बंद रहता है या धीरे-धीरे सुनाई देना कम हो रहा है, तो इसे इग्नोर न करें।
कान में लंबे समय तक खुजली: थोड़ी खुजली सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे, तो यह खतरे की घंटी है।
कान में अचानक तेज दर्द: मुंह खोलते समय या बिना किसी कारण अचानक तेज दर्द होना कैंसर का संकेत हो सकता है।
बार-बार वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन: अगर कान में बार-बार इंफेक्शन हो रहा है और दवाओं से भी ठीक नहीं हो रहा, तो तुरंत जांच कराएं।
सिरदर्द, जी मिचलाना या उल्टी: कान दर्द के साथ सिरदर्द, चक्कर, मतली या उल्टी होना गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
कान के पर्दे को नुकसान: अगर आपको लग रहा है कि कान का पर्दा फट गया है या सुनने में अचानक बदलाव आया है, तो तुरंत ENT डॉक्टर से संपर्क करें।
किन कारणों से बढ़ता है कान के कैंसर का खतरा?
कान की साफ-सफाई का ध्यान न रखना
बार-बार कान में तेज चीजें डालना
लंबे समय तक कान का इंफेक्शन
कमजोर इम्यूनिटी
खराब लाइफस्टाइल और खानपान
धूप में ज्यादा रहना (बाहरी कान के कैंसर में)

समय पर इलाज क्यों है जरूरी?
अगर कान के कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए, तो सर्जरी, रेडिएशन और दवाओं के जरिए इलाज संभव है। लेकिन देर होने पर यह बीमारी
दिमाग तक फैल सकती है, सुनने की शक्ति खत्म कर सकती है और जानलेवा साबित हो सकती है।
कान के कैंसर से बचाव के जरूरी उपाय
कान में बिना जरूरत कुछ भी न डालें
कान को साफ और सूखा रखें
बार-बार होने वाले इंफेक्शन को नजरअंदाज न करें
किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से मिलें
स्मोकिंग और तंबाकू से दूरी बनाएं
नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
नोट: कान से जुड़ी छोटी-सी समस्या भी कभी-कभी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है। कान से खून, पानी, दर्द या सुनने में दिक्कत जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय रहते जांच और सही इलाज ही कान के कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।