
नारी डेस्क : अच्छी लाइफस्टाइल हमारी सेहत पर अच्छा प्रभाव डालती है, जबकि जंक फूड का अधिक सेवन शरीर को कई गंभीर बीमारियों की ओर ले जाता है। मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी समस्याएं आज आम होती जा रही हैं, जिनकी बड़ी वजह अस्वस्थ खानपान है। इसी बीच बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब यूके में रात 9 बजे से पहले टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जंक फूड के विज्ञापन नहीं दिखाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि ऐसे विज्ञापन बच्चों को गलत खानपान की ओर आकर्षित करते हैं, जिससे कम उम्र में ही मोटापा और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
क्यों लगाया गया जंक फूड विज्ञापनों पर बैन?
रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चे टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाले जंक फूड Ads से जल्दी प्रभावित होते हैं। इन विज्ञापनों को देखकर बच्चे माता-पिता से जिद कर ऐसे फूड्स खाने की मांग करते हैं। यही वजह है कि सरकार ने बच्चों को अस्वस्थ खाने की आदतों से दूर रखने के लिए दिन के समय जंक फूड Ads पर रोक लगाने का फैसला किया है। जंक फूड में जरूरत से ज्यादा शुगर, नमक, तेल और प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट्स (Processed ingredients) होते हैं, जो बच्चों की सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक माने जाते हैं।

विज्ञापनों से पहले टैक्स का सहारा
जंक फूड विज्ञापनों पर बैन से पहले ब्रिटेन सरकार ने कई प्री-पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर टैक्स भी बढ़ाया था। इनमें रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी, मिल्कशेक्स और स्वीट योगर्ट ड्रिंक्स शामिल हैं। इसका मकसद शुगरी और हाई-कैलोरी ड्रिंक्स की खपत को कम करना है।
दूसरे देशों ने भी उठाए सख्त कदम
ब्रिटेन के अलावा कई देशों ने जंक फूड के खिलाफ सख्त नियम लागू किए हैं।
चिली में जंक फूड विज्ञापनों पर पूरी तरह बैन है।
मेक्सिको में शुगरी ड्रिंक्स पर भारी टैक्स और स्कूलों में जंक फूड पर रोक है।
भारत में फिलहाल देशव्यापी बैन नहीं है, हालांकि FSSAI ने स्कूलों के आसपास जंक फूड प्रमोशन रोकने का प्रस्ताव रखा है।

बच्चों के लिए जंक फूड क्यों है खतरनाक?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार जंक फूड का ज्यादा सेवन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास दोनों को नुकसान पहुंचाता है।
कम उम्र में मोटापा (Obesity)
टाइप 2 डायबिटीज का खतरा
दिल की बीमारियां और हाई कोलेस्ट्रॉल
पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं, कब्ज और आंतों के रोग।
दिमागी विकास और मेमोरी पर बुरा असर।
इम्युनिटी कमजोर होना।
दांतों की सड़न और कमजोरी
हड्डियों का कमजोर होना।

सरकार का यह फैसला बच्चों को जंक फूड की लत से बचाने और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अन्य देश भी ऐसे नियम अपनाएं, तो बच्चों में बढ़ते मोटापे और लाइफस्टाइल बीमारियों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।