नारी डेस्क: अक्सर लोग पूछते हैं थायरॉइड है लेकिन इससे वजन बढ़ेगा या घटेगा कैसे पता चले? दरअसल थायरॉइड एक ग्रंथि है जो शरीर का मेटाबॉलिज्म कंट्रोल करती है। यही तय करता है कि शरीर कैलोरी कितनी तेजी से जलाएगा। हार्मोन का असंतुलन है जिसे सही इलाज और दवा से कंट्रोल किया जा सकता है। चलिए जानते हैं थायरॉइड के दो अलग- अलग प्रकारों के बारे में

हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) वजन बढ़ाने वाला
जब थायरॉइड हार्मोन कम बनता है, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।अगर बिना ज्यादा खाए वजन बढ़ रहा है, तो यह हाइपोथायरॉइड हो सकता है।
इसके लक्षण:
-अचानक वजन बढ़ना
-चेहरे और शरीर में सूजन
-थकान और सुस्ती
-कब्ज
-बाल झड़ना
-ठंड ज्यादा लगना
-पीरियड्स अनियमित होना
वजन क्यों बढ़ता है?
मेटाबॉलिज्म धीमा पड़नने से शरीर ऊर्जा धीरे खर्च करता है। पानी और नमक के रुकने से शरीर में सूजन आ सकती है, जिससे वजन बढ़ा हुआ दिखता है। व्यक्ति जल्दी थक जाता है, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। हाइपोथायरॉइड में वजन आमतौर पर 3–7 किलो तक बढ़ता है, बहुत ज्यादा मोटापा सिर्फ इसी वजह से नहीं होता।
इसका इलाज
सही दवा (थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट) लेने से, नियमित वॉक या हल्की एक्सरसाइज करने से, हाई-प्रोटीन और फाइबर वाली डाइट और पर्याप्त नींद लेने से वजन कम किया जा सकता हे। हार्मोन संतुलित होने के बाद वजन धीरे-धीरे कंट्रोल में आ सकता है। याद रखें हर वजन बढ़ना हाइपोथायरॉइड नहीं होता और हर हाइपोथायरॉइड मरीज बहुत मोटा नहीं होता। दवा खुद से बंद करना खतरनाक हो सकता है।

हाइपोथायराइड (Hyperthyroidism) वजन घटाने वाला
जब थायरॉइड हार्मोन ज्यादा बनने लगता है, तो मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है।अगर खाना ठीक से खा रहे हैं फिर भी वजन तेजी से घट रहा है, तो यह हाइपरथायरॉइड का संकेत हो सकता है।
इसके लक्षण:
-अचानक वजन कम होना
- दिल की धड़कन तेज होना
-घबराहट या बेचैनी
-ज्यादा पसीना आना
-नींद कम आना
-हाथ कांपना
-बार-बार भूख लगना
वजन क्यों घटता है?
तेज मेटाबॉलिज्म से शरीर आराम की स्थिति में भी ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है। शरीर फैट के साथ-साथ मसल्स भी कम कर सकता है। ई लोगों को ज्यादा भूख लगती है, लेकिन फिर भी वजन घटता रहता है। अचानक और बिना वजह वजन कम होना इस बीमारी का बड़ा संकेत हो सकता है।
वजन बढ़ाने का इलाज
सही दवा से हार्मोन कंट्रोल करने से, संतुलित डाइट लेने से कैफीन और ज्यादा नमक से बचाव किया जा सकता है। हार्मोन संतुलित होने पर वजन सामान्य होने लगता है। याद रखें हर दुबलापन हाइपरथायरॉइड नहीं होता। इलाज में देरी दिल और हड्डियों पर असर डाल सकती है। हाइपरथायरॉइड शरीर को “तेज रफ्तार” में डाल देता है, जिससे वजन कम होता है लेकिन यह एक मेडिकल कंडीशन है, जिसे सही इलाज से कंट्रोल किया जा सकता है।
पक्का कैसे पता करें?
सिर्फ लक्षण देखकर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए TSH, T3, T4 ब्लड टेस्ट जरूरी है। हाइपोथायरॉइड शरीर को धीमा करता है, हाइपरथायरॉइड शरीर को तेज करता है। सही समय पर टेस्ट और इलाज से दोनों को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।