नारी डेस्क: हमारा शरीर अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालता है। इस पूरी प्रक्रिया में किडनी और यूरीनरी ट्रैक्ट की अहम भूमिका होती है। अगर पेशाब की मात्रा कम होने लगे, तो यह शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को एक घंटे में 20 मिलीलीटर से कम पेशाब आता है या पूरे दिन में 400 मिलीलीटर से कम पेशाब होता है, तो इसे सामान्य नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति को मेडिकल भाषा में ओलिगुरिया (Oliguria) कहा जाता है।
ओलिगुरिया क्या होता है?
ओलिगुरिया वह स्थिति है जिसमें शरीर में पेशाब का उत्पादन सामान्य से कम हो जाता है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, अगर 24 घंटे में पेशाब की मात्रा 400 एमएल से कम हो या प्रति घंटे 20 एमएल से कम हो, तो यह ओलिगुरिया का संकेत हो सकता है। कुछ मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, अगर किसी मरीज में लगातार 24 घंटे तक 0.3 ml/kg/h से कम पेशाब बन रहा है, तो उसे ओलिगुरिक माना जाता है। यह किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने का शुरुआती संकेत हो सकता है।

ओलिगुरिया और एनुरिया में क्या अंतर है?
कम पेशाब आने से जुड़ी एक और गंभीर स्थिति है, जिसे एनुरिया (Anuria) कहते हैं। ओलिगुरिया में पेशाब कम आता है, जबकि एनुरिया में पेशाब लगभग बंद हो जाता है। अगर 24 घंटे में 100 एमएल से भी कम पेशाब बने या बिल्कुल न बने, तो यह एनुरिया की स्थिति हो सकती है। यह किडनी फेल होने का संकेत भी हो सकता है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
कम पेशाब आने के मुख्य कारण
कम पेशाब आने के पीछे आमतौर पर तीन तरह की समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं प्री-रीनल, रीनल और पोस्ट-रीनल कारण।
प्री-रीनल कारण (किडनी तक खून की कमी)
जब किडनी तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो पेशाब कम बनने लगता है।
डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) – कम पानी पीना, दस्त, उल्टी या ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
ब्लीडिंग या सर्जरी – खून की कमी से भी किडनी प्रभावित हो सकती है।
हार्ट की समस्या – हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर या पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी स्थितियों में खून का संचार प्रभावित होता है, जिससे पेशाब कम हो सकता है।
ब्लड वेसल ब्लॉकेज – किडनी की धमनियों या नसों में रुकावट भी इसका कारण हो सकती है।

रीनल कारण (किडनी की खुद की बीमारी)
जब किडनी में ही कोई संक्रमण या सूजन हो जाती है, तो पेशाब का उत्पादन घट सकता है। नेफ्रोटॉक्सिक दवाओं का असर ये सभी स्थितियां किडनी की फिल्टर करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं।
पोस्ट-रीनल कारण (यूरीन के रास्ते में रुकावट)
अगर पेशाब बनने के बाद बाहर निकलने के रास्ते में रुकावट आ जाए तो भी पेशाब कम आ सकता है यूरेटेरल ब्लॉकेज (किडनी से ब्लैडर तक जाने वाली नली में रुकावट) बीपीएच (पुरुषों में प्रोस्टेट का बढ़ना), ट्यूमर, ब्लैडर आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन इन कारणों से यूरीन का प्रवाह रुक जाता है और पेशाब की मात्रा कम हो जाती है।
कम पेशाब आने के खतरे
अगर लंबे समय तक पेशाब कम आता रहे, तो शरीर में कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
शरीर में पोटैशियम बढ़ जाना (इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन)
मांसपेशियों में फड़कन या कमजोरी
पाचन तंत्र की समस्या और गैस्ट्रिक ब्लीडिंग
अनियमित धड़कन या हाई ब्लड प्रेशर
सांस लेने में दिक्कत
इन समस्याओं से बचने के लिए समय रहते इलाज जरूरी है।

क्या पानी पीने से राहत मिल सकती है?
अगर पेशाब कम आने की वजह सिर्फ डिहाइड्रेशन है, तो पर्याप्त पानी पीने से सुधार हो सकता है। सूप, पतला जूस या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक भी शरीर को रीहाइड्रेट करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन अगर बिना स्पष्ट कारण के पेशाब कम आ रहा है या इसके साथ कमजोरी, सूजन, बुखार या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कम पेशाब आना एक साधारण समस्या नहीं है। यह किडनी या शरीर की अन्य गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। अगर एक घंटे में 20 एमएल से कम या पूरे दिन में 400 एमएल से कम पेशाब हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।