नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान, ज्यादा नमक और जंक फूड का सेवन, कम पानी पीना और बढ़ता तनाव ये सभी हमारी किडनी पर बुरा असर डाल रहे हैं। किडनी हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है। यह खून को साफ करती है, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालती है और पानी व इलेक्ट्रोलाइट (सोडियम, पोटैशियम आदि) का संतुलन बनाए रखती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर धीरे-धीरे कई संकेत देने लगता है। इन लक्षणों को समय रहते पहचान लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि लापरवाही करने पर स्थिति किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है।
कमर या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
अगर कमर के निचले हिस्से या पसलियों के नीचे लगातार दर्द हो रहा है, तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। यह दर्द कभी-कभी पेट के किनारों या जांघों तक भी फैल सकता है। शुरुआत में हल्का दर्द होता है, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ सकता है।

बार-बार पेशाब आना
अगर आपको सामान्य से ज्यादा बार पेशाब आ रहा है, खासकर रात में, तो यह किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है। यह सिर्फ ज्यादा पानी पीने की वजह से नहीं होता, बल्कि किडनी की कार्यक्षमता में कमी के कारण भी हो सकता है।
पेशाब में जलन या दर्द
पेशाब करते समय जलन, दर्द या असहजता महसूस होना भी गंभीर संकेत है। यह किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण का संकेत हो सकता है।
पेशाब का रंग बदलना
सामान्य तौर पर पेशाब का रंग हल्का पीला होता है। अगर पर्याप्त पानी पीने के बाद भी पेशाब का रंग गहरा, धुंधला या उसमें झाग दिखाई दे, तो तुरंत जांच कराएं। पेशाब में खून आना तो बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
चेहरे या आंखों के नीचे सूजन
सुबह उठते समय अगर चेहरे या आंखों के नीचे सूजन दिखाई दे, तो यह शरीर में तरल पदार्थ जमा होने का संकेत हो सकता है। किडनी जब ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है।
लगातार थकान और कमजोरी
बिना ज्यादा काम किए भी अगर थकान महसूस हो रही है, तो यह शरीर में विषैले तत्व जमा होने की वजह से हो सकता है। किडनी की खराबी से शरीर की ऊर्जा कम हो जाती है और व्यक्ति कमजोर महसूस करने लगता है।

भूख कम लगना और उल्टी
बार-बार मतली आना, उल्टी होना या खाने की इच्छा कम होना भी किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
त्वचा में खुजली और सांस लेने में परेशानी
अगर शरीर में लगातार खुजली हो रही है या थोड़ी-सी मेहनत में सांस फूलने लगती है, तो यह भी किडनी फेलियर का गंभीर लक्षण हो सकता है। शरीर में तरल पदार्थ जमा होने से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
क्रिएटिनिन टेस्ट क्यों जरूरी है?
किडनी की कार्यक्षमता जांचने के लिए ब्लड में क्रिएटिनिन की मात्रा मापी जाती है। अगर क्रिएटिनिन लेवल बढ़ा हुआ हो, तो यह किडनी की कमजोरी का संकेत हो सकता है। नियमित जांच से बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है।
कब डॉक्टर से मिलें?
अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से 4-5 लक्षण लगातार दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और इलाज से किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी बातें
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। ज्यादा नमक और जंक फूड से बचें। ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखें।

नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन न करें। रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। किडनी हमारे शरीर की सफाई करने वाली मशीन की तरह काम करती है। अगर इसमें जरा सी भी गड़बड़ी हो, तो पूरा शरीर प्रभावित होता है। इसलिए कमर दर्द, बार-बार पेशाब आना, सूजन या थकान जैसे संकेतों को हल्के में न लें। समय पर पहचान और इलाज ही किडनी फेलियर से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।