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नसों में ना होने दें ब्लॉकेज, वेरिकाज वेन्स से बचाएंगी ये 4 चीजें

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 06 Aug, 2019 09:17 AM
नसों में ना होने दें ब्लॉकेज, वेरिकाज वेन्स से बचाएंगी ये 4 चीजें

गलत लाइफस्टाइल के चलते आज हर व्यक्ति किसी ना किसी समस्या से जूझ रहा है। जहां जो समस्याएं लोगों को 35-40 की उम्र में देखने को मिलती थी वहीं अब युवा भी इन बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इन्हीं में से एक समस्या है वैरिकोज वेन्स (Varicose Veins) की। इसमें पैरों की नसों में सूजन आ जाती है, जिसके कारण चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है।

 

शोध के मुताबिक, करीब 7 फीसदी युवा इस बीमारी से परेशान है, जिसमें अधिकतर संख्या महिलाओं की है। चलिए आज हम आपको इस बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव के कुछ तरीके बताते हैं, जिससे आप इससे बच सकते हैं।

क्या है वैरिकोज वेन्स?

वैरिकोज वेन्स बढ़ी हुई हुई नसें होती हैं, जो नसों में दबाव बढ़ जाने के कारण होती है। इसमें आमतौर पर त्वचा की सतह के नीचे उभरती हुई नीली नसें दिखती हैं। यह पैर और पंजों कोअधिक प्रभावित करती हैं। सूजी और मुड़ी हुई नसों को स्पाइडर वेन्स भी कहा जाता है।

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महिलाओं में 4 गुणा ज्यादा होता है इसका खतरा

वैरिकोज वेन्स के कारण नसों में सूजन आ जाती है, जिसका असर सबसे ज्यादा पैरों पर होता है। महिलाओं में इस बीमारी का खतरा पुरूषों के मुकाबले 4 गुना ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाएं एक ही जगह पर बैठी रहती हैं। इसके अलावा कसरत न करना, तंग कपड़े और ऊंची एड़ी के जूते पहनना के कारण भी महिलाएं इसकी चपेट में जल्दी आ जाती हैं।

कब और कैसे होता है यह रोग?

जब शरीर के निचले अंगों की नसों के वाल्व खराब हो जाते हैं तब इस बीमारी का असर दिखना शुरू होता है। इसके कारण निचले अंगों से दिल की ओर खून का प्रवाह कम हो जाता है, जिसके कारण सूजन, दर्द, थकान, खुजली और खून के थक्के बनना शुरू हो होता है। शुरूआत में कम परेशानी होने के कारण लोग इसे इग्नोर कर देते हैं लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले लेती हैं।

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वैरिकोज वेन्स के कारण

-आयु, लिंग, आनुवंशिक
-वजन बढ़ना
-ज्यादा देर तक एक ही स्थिति में रहना
-बुढ़ापे में भी नसों में टूट फूट हो सकती है।
-प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन्स चेंज होने के कारण
-समय से पहले माहवारी या मेनोपॉज

वैरिकोज वेन्स के लक्षण

-नसों का बैंगनी या नीला होना
-नसों का रस्सियों की तरह मुड़ जाना
-पैरों में एक या भारीपन महसूस होना।
-जलन, चीजें, मांसपेशियों में ऐंठन
-पैरों के निचले हिस्से में सूजन।
-नसों के आसपास खुजली होना।
-टखने के पास त्वचा का अल्सर

कब होती है डॉक्टर की जरूरत?

समय पर इलाज ना मिलने के कारण यह बीमारी अल्सर, एक्जिमा और हाई बीपी का कारण भी बन सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप इस बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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बचाव के तरीके

वैरिकोज नसों से बचने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें और भोजन के बाद कम सेकम 10-15 मिनट की सैर करें। इसके अलावा अपने खान-पान खास ध्यान दें, ताकि आप इस समस्या से बचे रहें।

अब हम आपको बताते हैं कि कैसे सही डाइट और घरेलू नुस्खों से आप इस बीमारी को दूर कर सकते हैं।

प्लांट बेस्ड डाइट

ऐसा भोजन जिसमें जीवन है यानि प्लांट बेस्ड डाइट।इसके लिए अपनी डाइट में फल, सब्जियां, नट्स, अनाज, स्प्राउट्स आदि शामिल करें। जो भोजन पका हो उसे पकने के एक पहर यानि 3 घंटों के अंदर खा लेने चाहिए। इसके अलावा बोतलबंद, डिब्बाबंद और पैकेट बंद भोजन ना करें।

ऐसा भोजन जिसमें हो पूर्णता

वो भोजन जो हमें सीधे-सीधे प्राकृति से मिलता है वो पूर्ण होता है और उसमें से कुछ निकाला नहीं जाता। ऐसे में सफेद की बजाए ब्राउन चावल खाएं। इसके अलावा चीनी की बजाए खजूर - गुड़, नारियल - कच्चे नारियल की गिरी, आटा चौकर के साथ खाएं।

शुद्ध शाकाहारी भोजन खाएं

अपने डाइट में शुद्ध शाकाहारी भोजन को शामिल करें। यहां तक कि दही और दूध का सेवन भी ना करें। WHO के मुताबिक आजकल मिलने वाला दूध इतना मिलावटी है कि अगर हम इसे पीते रहेंगे तो 2025 तक 87% भारत को कैंसर होगा। ऐसे में बेहतर होगा कि आप पनीर, घी और मक्खन से भी दूर रहें और वेज फूड्स खाएं।

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पानी से भरपूर डाइट

भोजन दो तरह का होता है पानी से भकपूर और बिना पानी वाला। आपकी 70% डाइट में वॉटर रिच फूड्स और बाकी अन्य चीजों से भरपूर होनी चाहिए। जिसमें कोई पानी नहीं होता जैसे अनाज, चावल, गेहूं, चपाती, दाल और सूखे मेवे का 30% हिस्सा अपनी डाइट में लें। जबकि तरबूज, पपीता, अंगूर, संतरा, टमाटर, पत्तेदार सब्जियां, लौकी, खीरा आदि को ज्यादा से ज्यादा डाइट में शामिल करें।

जैतून का तेल

100 ग्राम जैतून के तेल में 3-4 बारीक कद्दूकस किए हुए नींबू के छिलके को मिक्स करके कम से कम 10-15 मिनट धूप में रखें। इसके बाद इसमें 30 ml सायप्रस ऑयल मिक्स करें। इससे रोजाना रात तो सोने से पहले मसाज करें और फिर कपड़े से कवर कर दें। इससे आपकी समस्या भी दूर होगी और ब्लद सर्कुलेशन भी तेज होगा।

काली किशमिश

रात को 8-10 किशमिश पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट करें। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है, जिससे नसों को मजबूती मिलती है।

अलसी के बीज

दोपहर को लंच करने के करीब 1 घंटे बाद 1 चम्मच अलसी के बीजों का सेवन करें। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जिससे वैरिकोस वेन्स की समस्या दूर होती है। इसके अलावा भिगे हुए चिया सीड्स को खाना खाने से पहले 40-50 मिनट पहले खाने से भी इस समस्या में आराम मिलेगा।

एप्पल साइड विनेगर

हल्के गुनगुने पानी में आधा चम्मच पिसी बड़ी लाल मिर्च, 1 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर और 1 चम्मच शहद को मिक्स करें। इसे भोजन के आधे घंटे बाद पिएं। इससे भी आपकी बीमारी छूमंतर हो जाएगी।

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