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बांके बिहारी मंदिर में हलवाई ने भाेग बनाने से किया इनकार, टूटी सैकड़ों साल पुरानी परंपरा

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 16 Dec, 2025 10:16 AM
बांके बिहारी मंदिर में हलवाई ने भाेग बनाने से किया इनकार, टूटी सैकड़ों साल पुरानी परंपरा

नारी डेस्क: मथुरा के बांके बिहारी जी महाराज मंदिर में इस बार जो हुआ उसकी तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। यहां हलवाई की जिद्द ने सालों पुरानी परंपरा को तोड़ दिया। भोग तैयार करने वाले हलवाई बकाया भुगतान न मिलने के कारण काम पर नहीं आए और इससे ठाकुर जी बीना भोग के ही रह गए। इससे मंदिर का माहौल तो खराब हुआ ही भक्त भी काफी निराश हुए।


ठाकुर जी को लगते हैं चार भोग

मंदिर में ठाकुर जी को प्रतिदिन चार भोग अर्पित किए जाते हैं - बालभोग (सुबह श्रृंगार के बाद), राजभोग (दोपहर), उत्थापन भोग (शाम) और शयन भोग (रात्रि)। सोमवार सुबह जब बाल भोग का इंतजार किया जा रहा था तो पता चला कि हलवाई आए ही नहीं। कल एकादशी थी ऐसे में  बांके बिहारी महाराज को दोपहर का राजभोग भी समय पर नहीं मिला। बांके बिहारी मंदिर की हाई पावर कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने जानकारी मिलते ही व्यक्तिगत रूप से व्यवस्था की और भोग तैयार कराया। 


मंदिर में हुआ हंगामा

गोस्वामी ने बताया कि आज ठाकुर बांके बिहारी महाराज को समय पर भोग नहीं लग पाया,  इसकी वजह कमेटी की ओर से मंदिर के लिए तय किए गए हलवाइयों का समय पर नहीं पहुंचना रहा।  हंगामे के बाद पता चला कि कमेटी ने हलवाइयों का पिछला भुगतान नहीं किया, इसलिए वे काम पर ही नहीं आए। सेवायतों ने मांग की है कि हलवाइयों का तुरंत भुगतान किया जाए ताकि आगे चलकर ठाकुर जी सेवा में कोई रुकावट न आए।


हलवाई को नहीं मिला वेतन


दरअसल श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी का गठन किया है।  उसी के अंतर्गत ठाकुर जी के लिए प्रसाद और भोग की सामग्री तैयार करने के लिए हलवाई नियुक्त किया गया है, जिसे प्रतिमाह अस्सी हजार रुपये वेतन दिया जाता है, लेकिन कुछ महीनों से हलवाई को वेतन नहीं दिया जा रहा था. जिसके कारण हलवाई ने ठाकुर जी के लिए भोग ना बनाने का फैसला लिया। सेवायतों का कहना है कि सैकड़ों साल में पहली बार बाल भोग की परंपरा टूटी है।

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