11 JANSUNDAY2026 9:24:06 PM
Nari

200 साल बाद बन रहा चतुर्ग्रही योग, जानिए व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 06 Jan, 2026 12:20 PM
200 साल बाद बन रहा चतुर्ग्रही योग, जानिए व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

 नारी डेस्क: हिंदू धर्म में सकट चौथ का व्रत बहुत विशेष माना जाता है। यह व्रत हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत करती हैं। सकट चौथ को तिल चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और माघी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस वर्ष सकट चौथ 6 जनवरी 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार लगभग 200 साल बाद चतुर्ग्रही योग बन रहा है, जिसे बहुत शुभ माना जा रहा है।

सकट चौथ 2026 की तिथि (Sakat Chauth Date 2026)

वैदिक पंचांग के अनुसार,

चतुर्थी तिथि की शुरुआत: 6 जनवरी सुबह 8:02 बजे

चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 7 जनवरी सुबह 6:51 बजे

उदयातिथि के अनुसार, 6 जनवरी को ही सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा।

PunjabKesari

सकट चौथ का महत्व

सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश, सकट माता और चंद्र देव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से संतान से जुड़े सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

सकट चौथ पर पूजा और व्रत विधि

इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखा जाता है। शाम को भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है। तिल से बने लड्डू और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत जरूरी माना जाता है।

सकट चौथ 2026 चंद्रोदय का समय

इस वर्ष सकट चौथ के दिन चंद्रमा रात 9:00 बजे निकलेंगे। चंद्र दर्शन के बाद चंद्र देव को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही व्रत का पारण (व्रत खोलना) किया जाता है।

PunjabKesari

व्रत पारण का नियम

चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पानी पीकर व्रत खोला जाता है। ऐसा माना जाता है कि बिना चंद्र दर्शन के व्रत का पारण करना शुभ नहीं होता। सकट चौथ व्रत कथा का महत्व सकट चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ने या सुनने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। यह कथा व्रत को पूर्ण फल देने वाली मानी जाती है।

सकट चौथ 2026 एक बहुत ही शुभ अवसर है, खासकर इस बार बनने वाले विशेष योग के कारण। इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत रखने से संतान को सुख, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। जय श्री गणेश   

Related News