
नारी डेस्क : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर लंबे समय से एक सवाल चर्चा में रहा है वे सार्वजनिक मंचों पर अपना दाहिना हाथ अक्सर लबादा (क्लोक) के नीचे क्यों रखते थे। अब इसके पीछे की वजह सामने आई है, जिसका संबंध वर्ष 1981 में हुए एक जानलेवा हमले से है।
1981 का जानलेवा हमला
खामेनेई जब ईरान के राष्ट्रपति थे, तब 27 जून 1981 को तेहरान की एक मस्जिद में नमाज़ के बाद वे समर्थकों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने उनके सामने टेबल पर टेप रिकॉर्डर रखा और उसे चला दिया। करीब एक मिनट बाद रिकॉर्डर से सीटी जैसी आवाज आई और तेज़ विस्फोट हो गया।

हमले में गंभीर चोट
इस विस्फोट में खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके दाहिने हाथ और फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा। कई महीनों के इलाज के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन दाहिना हाथ स्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो गया। बताया जाता है कि इस हमले की जिम्मेदारी उस समय सक्रिय धार्मिक शासन विरोधी उग्र संगठनों पर डाली गई थी।
क्यों छिपाते थे दाहिना हाथ?
स्थायी चोट के बाद खामेनेई ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में दाहिने हाथ को लबादा के नीचे रखना शुरू किया। माना जाता है कि यह फैसला निजता, गरिमा और सार्वजनिक छवि बनाए रखने के लिए लिया गया। खामेनेई ने उस दौर में कहा था, मुझे इस हाथ की ज़रूरत नहीं। अगर मेरा दिमाग और मेरी ज़ुबान काम करती रहें, तो वही काफ़ी है। इसके बाद उन्होंने बाएं हाथ से लिखना सीखा और धार्मिक-राजनीतिक नेतृत्व में आगे बढ़ते गए।
लंबे समय तक नेतृत्व
समाचार वेबसाइट के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई ने लगभग 35 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया, जिससे वे दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शामिल हो गए। दरअसल, उनकी मौत को ईरानी शासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे देश के नेतृत्व पर दबाव और बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिका और इज़राइल पहले ही ईरान की सत्ता संरचना को कमजोर करने की बात कह चुके हैं।