नारी डेस्क: सुशांत सिंह राजपूत की आज 40वीं बर्थ एनिवर्सरी है। 34 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था। दुनिया भर में फैंस इस दिन को दिवंगत एक्टर को श्रद्धांजलि के तौर पर मना रहे हैं, जो 'काई पो चे!', 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' और 'दिल बेचारा' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ एक सफल अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि एक बेहद तेज़ दिमाग, जिज्ञासु और संवेदनशील इंसान भी थे। उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर आइए जानते हैं उनसे जुड़े 9 ऐसे अनजान सच , जो आज भी बहुत से फैंस को नहीं पता हैं।
पढ़ाई में थे टॉपर
सुशांत बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थे। उन्होंने AIEEE जैसी कठिन परीक्षा में शानदार रैंक हासिल की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही थिएटर से उनका झुकाव बढ़ा। टीवी से करियर शुरू करने से पहले सुशांत एक प्रोफेशनल डांसर थे। उन्होंने श्यामक डावर डांस अकादमी से ट्रेनिंग ली थी

NASA और स्पेस में थी गहरी रुचि
बहुत कम लोग जानते हैं कि सुशांत को खगोल विज्ञान (Astronomy) से बेहद लगाव था। उन्होंने अपनी छत पर टेलीस्कोप लगा रखा था। वह अंतरिक्ष और ग्रहों पर घंटों पढ़ते और बात करते थे। श्रद्धांजलि के एक अनोखे तरीके के तौर पर, सुशांत ने अपनी दिवंगत माँ के नाम पर एक लूनर क्रेटर रिसर्च प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद दी। यह साइंस, यादों और भावनाओं को मिलाने का उनका तरीका था, जिससे यह साबित हुआ कि अंतरिक्ष के लिए उनका प्यार सिर्फ़ बौद्धिक नहीं, बल्कि बहुत गहरा भावनात्मक भी था।
50 सपनों की लिस्ट बनाई थी
सुशांत ने अपनी जिंदगी के लिए 50 सपनों की एक लिस्ट बनाई थी, जिसमें एडवांस्ड फिजिक्स सीखना, हवाई जहाज उड़ाना, मार्शल आर्ट्स में महारत हासिल करना और इंसान के दिमाग को समझना शामिल था। आम बकेट लिस्ट से अलग, सुशांत ने अनुशासन और इरादे के साथ इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक्टिव रूप से काम किया।
किताबों से था खास रिश्ता
वह बड़े पैमाने पर किताबें पढ़ते थे। दर्शन, विज्ञान और आत्म-विकास से जुड़ी किताबों में खास रुचि रखते थे। सुशांत का मानना था कि पैसा आ-जा सकता है, लेकिन ज्ञान हमेशा साथ रहता है। यही वजह थी कि वहअलग-अलग विषयों पर सीखना पसंद करते थे। नई स्किल्स सीखने में निवेश करते थे

समाज और बच्चों के लिए करते थे काम
सुशांत ने बिना किसी अटेंशन या पहचान की चाह के, गरीब बच्चों, खासकर लड़कियों की पढ़ाई में मदद की। उनका मानना था कि सच्ची चैरिटी को किसी वैलिडेशन की ज़रूरत नहीं होती। उनके ज़्यादातर परोपकारी काम उनकी मौत के बाद ही सामने आए, जिससे उनका एक दयालु पहलू सामने आया जिसे उन्होंने प्राइवेट रखा था।
अपने किरदारों में पूरी तरह डूब जाते थे
चाहे एमएस धोनी हो या काय पो चे वह रोल के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को बदल लेते थे। महीनों तक उसी दुनिया में जीते थे जीवन, मृत्यु, सफलता और अस्तित्व पर सोचते थे खुद से सवाल करना और जवाब ढूंढना उन्हें पसंद था। यही गहराई उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी।
दिलाें में आज भी जिंदा हैं सुशांत
सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ एक स्टार नहीं थे, बल्कि एक विचारशील इंसान, एक सीखने वाला दिमाग और एक ख्वाब देखने वाली आत्मा थे। उनकी सोच और जिज्ञासा आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करती है। सुशांत चले गए, लेकिन उनकी सोच आज भी जिंदा है।