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काशी विश्वनाथ मंदिर की कहानी,  कई बार उजड़कर बसी बाबा की नगरी

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 14 May, 2024 05:58 PM
काशी विश्वनाथ मंदिर की कहानी,  कई बार उजड़कर बसी बाबा की नगरी

इन दिनाें काशी विश्वनाथ मंदिर काफी चर्चा में चल रहा है। यहां कल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  विधि विधान से दर्शन पूजन किया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री को मंदिर के अर्चकों ने विधि विधान से मंत्रोच्चार के साथ पूजन कराया। पूजन के दौरान प्रधानमंत्री ने दही, केसर युक्त दूध, घी, और जल से “बाबा” का अभिषेक किया और जीत के लिए आशीर्वाद मांगा। अगर आप  भी इस मंदिर में जाने की सोच रहे हैं तो चलिए जानते हैं इसके बारे में खास बातें। 

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भारत के उत्तर प्रदेश के प्राचीन शहर बनारस के विश्वनाथ गली में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर  पवित्र नदी गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित है और बारह ज्योतिर्लिंगस में से एक है। वाराणसी शहर को काशी भी कहा जाता है। इसलिए मंदिर को काशी विश्वनाथ मंदिर कहा जाता है। मंदिर को हिंदू शास्त्रों द्वारा शैव संस्कृति में पूजा का एक केंद्रीय हिस्सा माना जाता है।

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मंदिर के मुख्य देवता को श्री विश्वनाथ और विश्वेश्वर के नाम से जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ब्रह्मांड के भगवान। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।। वाराणसी को प्राचीन काल में काशी कहा जाता था, और इसलिए इस मंदिर को लोकप्रिय रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर कहा जाता है। यहीं पर सन्त एकनाथजी ने वारकरी सम्प्रदाय का महान ग्रन्थ श्रीएकनाथी भागवत लिखकर पूरा किया और काशीनरेश तथा विद्वतजनों द्वारा उस ग्रन्थ की हाथी पर धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गयी। 

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महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में प्रमुख मंदिरों से भव्य शोभा यात्रा ढोल नगाड़े इत्यादि के साथ बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाती है। विश्वनाथ मंदिर को इतिहास में कई मुस्लिम शासकों द्वारा बार बार तोड़ा गया। मुगल शासक औरंगज़ेब इस मंदिर को गिराने वाला अंतिम मुस्लिम शासक था जिसने मंदिर के स्थान पर वर्तमान ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया। वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा सन् 1780 में करवाया गया था।बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1835 में 1000 कि.ग्रा शुद्ध सोने द्वारा बनवाया गया था।

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यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती का आदि स्थान है। कहा जाता है कि जब देवी पार्वती अपने पिता के घर रह रही थीं जहां उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। देवी पार्वती ने एक दिन भगवना शिव से उन्हें अपने घर ले जाने के लिए कहा। भगवान शिव ने देवी पार्वती की बात मानकर उन्हें काशी लेकर आए और यहां विश्वनाथ-ज्योतिर्लिंग के रूप में खुद को स्थापित कर लिया। मंदिर एक अद्वितीय छत्र से सजा हुआ है जो शुद्ध सोने से बना है। अक्सर ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस स्वर्ण छत्र को देखते हैं, और मनोकामना मांगते हैं, उनकी मनोकामना पूरी होती है।
 

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