नारी डेस्क : रिश्तों में भरोसा, बातचीत और समझ सबसे मजबूत आधार माने जाते हैं. जब दो लोग किसी रिश्ते में होते हैं, तो यह उम्मीद स्वाभाविक होती है कि वे अपनी खुशी, नाराजगी और मतभेद खुलकर साझा करेंगे। लेकिन कई बार रिश्तों में एक ऐसा तरीका अपनाया जाता है, जो बाहर से शांत दिखता है, पर भीतर से बेहद नुकसानदेह होता है। इसे साइलेंट अब्यूज कहा जाता है।
क्या है साइलेंट अब्यूज?
चुप रहना हर बार गलत नहीं होता. कई बार इंसान खुद को संभालने या स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए खामोशी चुनता है. मगर जब यह चुप्पी किसी को डराने, दबाने या अपराधबोध में डालने के लिए इस्तेमाल की जाए, तब वह साइलेंट अब्यूज बन जाती है. इसमें सामने वाला बातचीत बंद कर देता है। न कॉल, न मैसेज, न जवाब बस दूरी और अनदेखी। इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति समझ ही नहीं पाता कि गलती क्या हुई और उसे किस बात की सजा मिल रही है। न अपनी बात रखने का मौका मिलता है, न समाधान का रास्ता दिखता है. यह मौन एक अदृश्य दंड बन जाता है, जो रिश्तों में तनाव और भावनात्मक चोट पैदा करता है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जानबूझकर बातचीत रोकना शांति नहीं बल्कि सजा देने का तरीका हो सकता है. यह व्यवहार सामने वाले में उलझन, असुरक्षा और आत्म-संदेह पैदा करता है. लगातार अनदेखी से व्यक्ति खुद को दोषी मानने लगता है और धीरे-धीरे अपनी आवाज दबा देता है।
चुप्पी से सजा देने की एक कहानी
रिया और आरव एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे और हर बात साझा करते थे. लेकिन जब भी रिया किसी मुद्दे पर असहमति जताती, आरव अचानक चुप हो जाता—न कॉल, न मैसेज. यह चुप्पी कई दिनों तक चलती। रिया खुद को दोषी मानने लगती, माफी मांगती और रोती। तब कहीं जाकर आरव बात करता। धीरे-धीरे रिया ने अपनी राय रखना बंद कर दिया, क्योंकि उसे उसी चुप्पी का डर सताने लगा।

त्रिशाला दत्त का इमोशनल संदेश
हाल ही में संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने लिखा कि कुछ लोग अपनी भावनाएं जाहिर करने के बजाय खामोशी को हथियार बनाते हैं। यह संकेत दिया जाता है कि बोलना खतरनाक है और सच कहने की कीमत रिश्ते का टूटना हो सकती है। त्रिशाला ने साफ कहा कि किसी को चुप्पी से पनिशमेंट देना गलत है। यह रिश्तों को ठीक नहीं करता, बल्कि सामने वाले को भीतर से तोड़ देता है। कई लोग इसलिए सब सहते रहते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि अगर उन्होंने बोला, तो हालात और बिगड़ जाएंगे।
आत्मसम्मान और शोषण के बीच फर्क
त्रिशाला ने यह भी समझाया कि हर चुप्पी गलत नहीं होती। अगर कोई गुस्से में है और थोड़ी देर का समय मांगता है ताकि वह कुछ गलत न कह दे, तो यह समझदारी है। लेकिन जब कोई जानबूझकर बात बंद करे ताकि दूसरा इंसान टूट जाए, तो यह पावर गेम बन जाता है। उनके शब्दों में—अपनी शांति बचाने वाली खामोशी आत्मसम्मान है, लेकिन किसी और को चोट पहुंचाने वाली चुप्पी शोषण। सच्चे रिश्ते बातचीत से मजबूत होते हैं, डर से नहीं।

निजी जीवन और सोच
त्रिशाला दत्त बचपन से कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरी हैं। मां के निधन के बाद उन्होंने जीवन को नए नजरिए से समझा। अमेरिका में रहने वाली त्रिशाला मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बोलती हैं। यही वजह है कि उनकी बातें आज के युवाओं तक गहराई से पहुंचती हैं। संदेश साफ है रिश्तों में खुद को खो देना प्यार नहीं। संवाद, सम्मान और सुरक्षा ही किसी भी रिश्ते की असली पहचान है।