
नारी डेस्क: सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इस स्थिति में सूर्य की रोशनी कुछ समय के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती। यह घटना केवल अमावस्या के दिन ही संभव होती है। वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण सौरमंडल की गति और खगोलीय संतुलन को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण या “रिंग ऑफ फायर”?
वलयाकार सूर्य ग्रहण सामान्य सूर्य ग्रहण से अलग होता है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा एक दीर्घवत्ताकार (अंडाकार) कक्षा में करता है। कभी वह पृथ्वी के पास होता है और कभी उससे दूर। जब अमावस्या के दिन चंद्रमा पृथ्वी से दूर होते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है, तब वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। इस स्थिति में सूर्य का बीच का हिस्सा चंद्रमा से ढक जाता है, लेकिन उसके किनारों से तेज रोशनी चमकती रहती है। आसमान में सूर्य एक चमकदार आग की अंगूठी जैसा दिखाई देता है। इसी कारण इसे “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है। यह दृश्य बेहद आकर्षक और दुर्लभ होता है।

सूर्य ग्रहण 2026: तारीख और समय
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, मंगलवार को लगा है। भारतीय समय (IST) के अनुसार यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट होगी। ग्रहण का चरम (पीक) समय, जब “रिंग ऑफ फायर” का दृश्य सबसे स्पष्ट दिखाई देगा, शाम 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट के बीच रहेगा। यही समय खगोल विज्ञान की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या भारत में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका और अंटार्कटिका जैसे क्षेत्रों में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। भारत में रहने वाले लोग इस खगोलीय घटना को अंतरिक्ष एजेंसियों और वेधशालाओं की लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से देख सकते हैं।

सूर्य ग्रहण देखते समय रखें सावधानी
सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। सूर्य की तेज किरणें आंखों की रोशनी को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ग्रहण देखते समय सामान्य धूप का चश्मा, एक्स-रे फिल्म या पानी में प्रतिबिंब देखकर देखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ये सभी तरीके असुरक्षित हैं। सुरक्षित तरीके से ग्रहण देखने के लिए केवल प्रमाणित सोलर फिल्टर चश्मे या सोलर फिल्टर लगे टेलीस्कोप और दूरबीन का ही उपयोग करना चाहिए। बच्चों को ग्रहण दिखाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
17 फरवरी 2026 का वलयाकार सूर्य ग्रहण एक अद्भुत और आकर्षक खगोलीय घटना है। “रिंग ऑफ फायर” का दृश्य प्रकृति की अनोखी सुंदरता को दर्शाता है। हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, फिर भी लोग इसे ऑनलाइन माध्यम से देख सकते हैं।