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Meena Kumari की जिंदगी के वो आखिरी 8 दिन, दुखी होकर कहा था- 'यहीं हल है तो मुझे घर पर चैन से मरने दो'

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 06 May, 2022 01:04 PM

बॉलीवुड में बहुत सी अदाकाराएं अपनी खूबसूरती के लिए फेमस रही हैं। रेखा, मुमताज, मधुबाला, डिंपल और नरगिस, इनकी खूबसूरती के चर्चे तो आज भी होते हैं और उन्हीं में शामिल थी एक और खूबसूरत हसीना जिसका नाम था मीना कुमारी। महजबिन बानो जो अभिनय की दुनिया में मीना कुमारी के नाम से मशहूर हुई थी। मीना कुमारी खूबसूरती के साथ साथ अपने हुनर से भरपूर थी। कहते थे कि दिलीप कुमार जैसे जानदार एक्टर को भी मानी कुमारी के सामने स्थिर रहने में मुश्किल होती थी। मधुबाला ने कहा था कि मीना जैसी आवाज किसी दूजी एक्ट्रेस की नहीं है। ऐसी आवाज जिसे सुनकर राजकपूर साहब तक अपने डायलॉग भूल जाते थे लेकिन इस मीना कुमारी की किस्मत में सुख नहीं था। निजी जिंदगी में उन्हें इतने जख्म मिले कि 39 साल की उम्र वो दुनिया से रूखसत हो गई।

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जितनी बुलंदियां उन्होंने अपने करियर में पाई निजी जीवन उतना दुखों से भरा रहा। 31 मार्च की 1972 की वो काली रात जो मीना को मौत के आघोष में हमेशा के लिए सुला गई लेकिन उसके पहले के मीना के वो 8 दिन कैसे गुजरे वो बहुत कम लोग जानते हैं आज के पैकेज में हम मीना कुमारी के आखिरी 8 दिन के बारे में ही बताएंगे। 

 

शराब की लत में डूबी मीना कुमारी इसकी इतनी आदी हो गई थी कि इसके बिना वह एक पल भी नहीं रह पाती थी। इस लत ने मीना को इतना बीमार कर दिया कि वो उठ नहीं पाई। दरअसल, पत्रकार विनोद मेहता ने अपनी किताब 'मीना कुमारी: द क्लासिक बायोग्राफी' में लिखा है कि मीना कुमारी को उनके डॉक्टर सईद टिमर्जा ने नींद की गोलियाें की जगह, रोज एक पेग ब्रांडी लेने की सलाह दी। ये सलाह इसलिए दी गई थी क्योंकि मीना कुमारी रातभर नहीं सोती थीं लेकिन एक पेग ब्रांडी कब ढेर सारे पैग में तब्दील हो जाती थी किसी को पता नहीं चलता था। इस लत ने उनके लिवर को पूरी तरह डैमेज कर दिया वह लिवर सोरायसिस नाम की बीमारी से पीड़ित हो गई थी जिसका इलाज करवाने वह लंदन भी गई थीं। 

अब बताते हैं मीना के वो आखिरी 8 दिनों के बारे में

24 मार्च 1972 में मीना अपनी बहनों के साथ फ्लैट में बैठी ताश खेल रही थीं। दोनों बहने अपनी बारी खेलने में समय लगा रही थी तो मीना ने कहा कि आप दोनों जब तक अपनी बारी खेलोंगी तब तक मैं मर जाउंगी इतना सुनते ही बड़ी बहन बोली मुन्ना अगर कोई जाएगा तो सबसे पहले मैं क्योंकि मैं सबसे बड़ी हुई। मीना को प्यार से मुन्ना कहते थे लेकिन मीना बोली कि नहीं तुम दोनों का अपना परिवार, बच्चे और जिम्मेदारियां है लेकिन मेरा कोई नहीं। इतना कहकर उन्होंने अपनी बात खत्म कर दी।

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25 मार्च, यानि उससे अगला दिन मीना कुमारी की हालत खराब हो रही थी बड़ी बहन खुर्शीद से कहा कि उनका कोई काम अब अधूरा नहीं है सब फिल्में वह पूरी कर चुकी हैं। मैंने तुम्हारे और तुम्हारे बच्चों के लिए कुछ छोड़ा है और जितना कर सकती हैं मैंने किया है। 
अब मैं मरने के लिए तैयार हूं। मीना को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। आक्सीजन का सिलेंडर उनके कमरे में होता था जिसकी उस रात मीना को जरूरत भी पड़ी। वह दर्द से तड़प रही थीं।


 
26 मार्च, मीना का इलाज कर रहे डाक्टर शाह को बुलाया गया जो उनका पहले से ही इलाज कर रहे थे। खुर्शीद ने कमाल अमरोही को भी बुलाया। लेकिन डाक्टर शाह ने कहा कि उन्हें दूसरे डाक्टर से बात करनी होगी। बहन और कमाल ने कहा कि कुछ भी करें लेकिन मीना को सही कर दें। 

 

27 मार्च को डाक्टर शाह अपने साथ दूसरे डाक्टर को साथ लेकर आए। उन्होंने कहा कि मीना को अस्पताल में भर्ती करना होगी लेकिन मीना कई बार अस्पताल रह चुकी थी वह दोबारा वैसे माहौल में नहीं जाना चाहती थीं। मीना ने कहा कि अगर मौत ही हल है तो क्यों ना मैं चैन से अपने घर मरूं। लेकिन बहन के बार बार कहने पर मीना मान गई। 

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28 मार्च को मीना को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। मीना ने अपनी बहन को पूछा कि आपके पास कितने पैसे हैं तो खुर्शीद ने कहा 100 रू. । तब मीना ने कहा कि इतने कम पैसे से इतने बड़े नर्सिंग होम कैसे जाएंगे तो मीना ने कहा कि निर्माता प्रेमजी से उन्होंने कुछ पैसे लेने हैं। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया था। प्रेमजी पैसे देने के लिए मान गए। उस दिन आखिरी बार मीना ने कंघी की और अपने बैडरूम की चाबी बहन को दी कि अब वह वापिस लौटकर नहीं आएगी। मेरे मरने के बाद इसे ताला लगा देना। मेरे मरने के बाद पहले मुझे यहां लाना और फिर बाबू जी और मां के पास ही दफना देना। मीना जी अपने पिता को बाबू जी कहती थी। उसी समय दरवाजे पर कोई आया। प्रेमजी ने 10 हजार रू. भिजवाए थे। मीना ने 5हजार खुर्शीद को दिए 5 हजार डाक्टर शाह को । रिश्तेदार आने शुरू हुए। खुर्शीद की बेटी अपनी मासी के गले लगी तो मीना ने कहा खुदा आफीस।

 

मीना जाने लगी तो पीछे मुड़ कर अलविदा नजर से सबकुछ देख गई। आगे उन्होंने लिफ्ट मेन को नमस्ते कहा लेकिन वो देखकर रोने लगा। मीना के बीमार होने की खबर सब और फैल गई जैसे ही वो बाहर निकली साफ-सफाई करने वाली जिसे मीना अक्सर कुछ रु, दे देती थी उस दिन मीना ने उन्हें अपना छोटा बैग उसे ही पकड़ा दिया और इतनी देर में एम्बुलैंस आई और मीना को ले गई। मीना के साथ उनकी बहनें व जीजा थे। एडमिट होने के बाद मीना ने कहा आपने कुछ नहीं खाया। कुछ खा लें और कमाल को भी फोन कर दे। अमरोही ने कहा कि वो शाम को आते हैं। वह बेटे के साथ पहुंचे और मीना का हाथ पकड़ कर बैठ गए । कुछ ऐसा ही 21 साल पहले हुआ था जब मीना एक एक्सीडेंट के चलते पूना के एक अस्पताल में भरती हुई थी और कमाल उन्हें मिलने आए थे ऐसे ही हाथ पकड़ कर उन्होंने मीना से अपने प्यार का पहला इजहार किया था। यहीं से प्रेम कहानी शुरू हुई थी। 

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29 मार्च  खुर्शीद अपने साथ खाना ले कर आई। दूसरी बहन भी आई। मीना ने कहा कि वह जल्द घर आ जाएगी और ताश खेंलेगी। यह बात सुनकर दोनों बहनों में हौंसला आ गया लेकिन उस रात मीना की तकलीफ काफी बढ़ गई। खुर्शीद से मीना ने कहा कि कुछ करों। 
डाक्टर ने दवा लिख दी। 

 

30 मार्च 10 डॉक्टरों ने मीटिंग की और परिवार को बुलाकर कहा कि अब मीना के बचने की उम्मीद नहीं है। खुर्शीद मीना से मिलने गई तो मीना ने नहीं पूछा के डाक्टर ने क्या कहा। ब्लकि पूछा कि आपने कुछ खाया। खुर्शीद ने कहा कि वो तब खाएंगी जब वह जूस पीएंगी। बहन की बात सुनकर मीना ने जूस पीया लेकिन मीना को उल्टी आ गई। इसके बाद मीना सो गई। हाल-चाल पूछने वालों को फोन आते रहे जिन्हें खुर्शीद ही अटैंड कर रही थी। 
अचानक ही रूम से चिल्लाने की आवाज आई और खुर्शीद भागकर पहुंची। मीना बाहें फैलाकर बैठी थी कि आपा मैं मरना नहीं चाहती। खुर्शीद ने मीना को बाहों में लिया था कि मीना का सिर एकतरफ लटक गया। डाक्टर ने चेक किया और कहा कि वह कोमा में चली गई हैं। 

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अगली सुबह मीना का शरीर सफेद पड़ गया। आक्सीजन की पाइप, पैर में लगी सुई और एक सुई और लगा दी गई जिससे मीना के शरीर में जमा गंदगी को बाहर निकाला जा रहा था। ढाई बजे तक मीना की हालत बिगड़ गई और फ्लयूड की जगह खून निकलने लगा। बहन ने आखिरी रस्में करने शुरू की क्योंकि वह सांसें थी। दोपहर बाद 3 बजकर 24 मिनट पर मीना ने आंखें खोली और कमरे में खड़े लोगों से देखा और 3.25 मिनट पर मीना ने बहन मधु के हाथों में दम तोड़ दिया। लोगों की चीखें सुनाई देने लगी। 

 

7 बजे मीना को घर से बाहर ले जाया गया। मीना जो मरना नहीं चाहती थी लेकिन दुनिया को इस तरह अलविदा कह गई। जीवन जो प्यार से चलता है वो ही उनकी किस्मत में नहीं था। सिर्फ गमों का अंबार जिसने उन्हें बॉलीवुड की ट्रैजडी क्वीन बना दिया।

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