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भारतीय औरतों के प्रेगनेंसी न होने की वजह यह बीमारी भी, याद रखें बचाव के ये तरीके

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 25 Sep, 2019 09:37 AM
भारतीय औरतों के प्रेगनेंसी न होने की वजह यह बीमारी भी, याद रखें बचाव के ये तरीके

आजकल महिलाओं को गर्भाशय टीबी या पेल्विक टीबी की समस्या काफी देखने को मिल रही है। इस बीमारी के चलते महिलाओं को बांझपन का शिकार होना पड़ता है। यह एक ऐसा रोग है जो माइको बैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि महिलाओं को गर्भाशय टीबी बारे में पूरी जानकारी हो।

 

क्या है गर्भाशय/यूटरस टीबी?

गर्भाशय टीबी में बीमारी गर्भाशय के पार्ट्स अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय का मुंह और वजाइना या वजाइना के मुख के आसपास के लिम्फ नोड्स में होती है। यह रोग आम तौर पर इंफेक्शन के कारण होता है, जिससे शरीर के अन्य भागों के साथ फेफड़े भी प्रभावित होते हैं।

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40% महिलाएं है गर्भाश्य टीबी की शिकार

हाल ही में हुए शोध में सामने आया है कि इस टीबी से पीड़ित हर 10 महिलाओं में से 2 गर्भधारण नहीं कर पाती। भारत में गर्भाशय टीबी के 40.80% मामले महिलाओं में देखे जाते हैं जिसके कारण करीब 25-30% महिलाओं को बांझपन का सामना करना पड़ता है। WHO रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में टीबी से प्रभावित सूची में भारत 27.9 लाख मरीजों के साथ नंबर 1 स्थान पर था। वहीं 2017 में टीबी से करीब 4.23 लाख मरीजों की मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में सबसे ज्यादा टीबी के मामले भारत, इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस और पाकिस्तान में दर्ज किए गए थे।

पुरूषों को भी हो सकती है समस्या

वैसे तो यह समस्या पुरूषों को भी हो सकती है लेकिन महिलाओं को इसका खतरा 20% अधिक होता है, जिसका कारण है सेहत को लेकर लापरवाही। दरअसल, काम के चक्कर में महिलाएं हाइजीन और खान-पान पर ध्यान नहीं देती, जिसके कारण वो इसकी चपेट में आ जाती हैं।

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खांसी और छींक से फैलती है यह बीमारी

बता दें कि आम टीबी की तरह गर्भाश्य टीबी भी खांसी और छींक के जरिए फैलता है। यह एक ऐसा रोग है जो संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंच जाता है। इस बीमारी की शुरूआत फेफड़ों से होती है जिसके बैक्टीरिया खून की जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों तक जाते हैं।

किन महिलाओं को होता है अधिक खतरा

अगर आप फिजिकल रूप से इंफेक्टिड व्यक्ति के करीब है तो इसका खतरा और भी बढ़ जाता है। साथ ही कमजोर इम्यून सिस्टम वाली महिलाएं जल्दी इसकी चपेट में आ जाती है। वहीं अगर यह बीमारी प्रेग्नेंसी के दौरान हो जाए तो इससे गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

कैसे बनता है बांझपन का कारण?

आमतौर पर फेफड़ों में इंफेक्शन होने पर इस बीमारी का पता चल जाता है। मगर जब बैक्टीरिया गर्भाश्य पर भी हमला करके फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुंचाते हैं तो बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। वहीं इस बैक्टीरिया के संपर्क में आने से 5-10% में हाइड्रो सल्पिंगिटिस होता है, जिसमें पानी ट्यूब में भर जाने के कारण यह समस्या हो सकती है। वहीं टीबी बैक्टीरिया मुख्य रूप से फैलोपियन ट्यूब को बंद करता है, जिससे पीरियड्स रेग्युलर नहीं आते या पूरी तरह से रुक जाते हैं।

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लक्षण

यह गर्भाशय के पार्ट्स अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, गर्भाशय का मुंह और वैजाइना या आसपास के लिम्फ नोड्स को प्रभावित करता है। पुरुषों में, यह प्रोस्टेट ग्रंथि और टेस्टीज़ प्रभावित कर सकता है। शुरूआती स्टेज में इसका कोई संकेत नहीं मिलता लेकिन 7-8 महीने बाद इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इससे बचने के लिए जरूरी है कि लक्षण पहचानकर समय पर इलाज करवाया जाए।

-योनि स्राव 
-निचले पेट में गंभीर दर्द
-अनियमित पीरियड्स
-अमेनोरिया
-हैवी ब्लीडिंग
-यौन सबंधों के बाद दर्द
-उबकाई या उल्टी
-वजन का कम होना
-बुखार जैसा लगना
-हृदय की धड़कन का तेज होना

कैसे करें बचाव?

-सबसे पहले तो आप संक्रमित व्यक्ति और भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें। अगर जाना जरूरी हो तो मास्क पहन लें।
-पर्सनल हाइजीन और प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
-डॉक्टर से सलाह लेकर टाइम टू टाइम टीबी का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
-डाइट में फल, हरी सब्जियां, बीन्स, साबुत अनाज, दूध, दही, मछली आदि जरूर शामिल करें।
-जंकफूड्स, कोल्ड ड्रिंक्स, फास्ट फूड्स और ऑयली फूड्स खाने से बचें।
-प्रदूषण से बचें और घर में अधिक से अधिक ऐसे पेड़-पौधे लगाएं, जिससे वातावरण शुद्ध हो।
-नियमित रूप से जॉगिंग, सैर, व्यायाम और योग जरूर करें। साथ ही फिजिकल तौर पर एक्टिव रहें।

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