नारी डेस्क: हर इंसान की शारीरिक संबंध (फिजिकल रिलेशन) बनाने की इच्छा अलग-अलग होती है। किसी की इच्छा ज्यादा होती है, तो किसी की कम। लेकिन अगर किसी व्यक्ति में यह इच्छा इतनी ज्यादा बढ़ जाए कि वह खुद पर कंट्रोल ही न कर पाए, तो इसे एक मानसिक समस्या माना जाता है। इस स्थिति को निम्फोमेनिया कहा जाता है।
क्या है निम्फोमेनिया?
निम्फोमेनिया कोई सामान्य यौन इच्छा नहीं है। यह एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार और बहुत ज्यादा शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा होती है। यह इच्छा इतनी तेज होती है कि व्यक्ति का दैनिक जीवन, रिश्ते, करियर और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है। कुछ मामलों में व्यक्ति को एक ही दिन में 10 से 12 बार शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा हो सकती है। यह सिर्फ इच्छा नहीं रहती, बल्कि एक बाध्यकारी आदत (Compulsive Behavior) बन जाती है, जिसे रोकना व्यक्ति के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है।

निम्फोमेनिया के प्रमुख लक्षण
इच्छा पर नियंत्रण न रहना: व्यक्ति चाहकर भी अपनी यौन इच्छाओं को रोक नहीं पाता। यह स्थिति रोजमर्रा के कामों में बाधा डालने लगती है।
लगातार यौन विचार: दिनभर दिमाग में शारीरिक संबंध से जुड़ी कल्पनाएं और विचार चलते रहते हैं, जिससे काम, पढ़ाई या अन्य जिम्मेदारियों पर ध्यान नहीं लग पाता।
रिश्तों और काम पर बुरा असर: अधिक यौन गतिविधियों के कारण रिश्तों में तनाव, झगड़े, सामाजिक समस्याएं और यहां तक कि नौकरी या करियर में भी नुकसान हो सकता है।
जोखिम भरा व्यवहार: ऐसे व्यक्ति कई पार्टनर्स के साथ असुरक्षित शारीरिक संबंध बना सकते हैं और इसके गंभीर परिणामों की परवाह नहीं करते।
निम्फोमेनिया क्यों होता है?
यह समस्या अचानक नहीं होती। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं दिमाग के हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन लंबे समय तक तनाव या डिप्रेशन बचपन या जीवन में हुआ यौन शोषण या मानसिक आघात अत्यधिक चिंता या भावनात्मक परेशानी लगातार तनाव में रहने से दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे यह समस्या पैदा हो सकती है।
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पुरुष और महिलाओं में फर्क
महिलाओं में इस स्थिति को निम्फोमेनिया कहा जाता है। पुरुषों में इसी तरह की समस्या को सैटेराइसिस (Satyriasis) कहा जाता है। हालांकि नाम अलग हैं, लेकिन दोनों में लक्षण और प्रभाव लगभग एक जैसे होते हैं—यौन इच्छा पर नियंत्रण खो देना। क्या निम्फोमेनिया का इलाज संभव है? दुनिया भर में निम्फोमेनिया को अलग से बीमारी के रूप में पूरी तरह मान्यता नहीं मिली है, लेकिन इसे आमतौर पर

हाइपरसेक्सुअलिटी डिसऑर्डर
सेक्सुअल एडिक्शन
के रूप में देखा जाता है।
इलाज के तरीके
साइकोथेरपी, खासकर CBT (Cognitive Behavioral Therapy) काफी मददगार मानी जाती है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर ऐसी दवाएं दे सकते हैं, जो यौन इच्छा और बाध्यकारी व्यवहार को कंट्रोल करें। सपोर्ट ग्रुप्स भी होते हैं, जहां लोग अपने अनुभव साझा करके मानसिक राहत पा सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति में इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बहुत जरूरी है।
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी तरह के इलाज या बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। ---