नारी डेस्क : महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर भगवान शिव की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, फल और मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। लेकिन पूजा के बाद शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को ग्रहण करना चाहिए या नहीं, इसे लेकर श्रद्धालुओं में अक्सर भ्रम रहता है। इस विषय पर शिव पुराण में स्पष्ट नियम बताए गए हैं।
क्या शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद खाना चाहिए?
शिव पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति भगवान शिव का भक्त है और नियमपूर्वक पूजा-व्रत करता है, उसे शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। ग्रंथ में बताया गया है कि शिव प्रसाद के दर्शन मात्र से पाप नष्ट होते हैं और श्रद्धा से ग्रहण करने पर असंख्य पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रसाद को हमेशा आदर और विनम्रता के साथ स्वीकार करना चाहिए।

शिव प्रसाद का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, शिव दीक्षा प्राप्त व्यक्ति के लिए योग्य शिवलिंगों पर चढ़ा नैवेद्य महाप्रसाद माना गया है। शिव पुराण में यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति सामने पड़े शिव प्रसाद को टालता है या जानबूझकर देर करता है, वह पाप का भागी बन सकता है। यहां तक कि भारी पापों से ग्रस्त व्यक्ति भी यदि शुद्ध भाव से शिव प्रसाद ग्रहण करे, तो उसके पाप नष्ट हो जाते हैं।
किन शिवलिंगों का प्रसाद नहीं खाना चाहिए?
शिव पुराण के अनुसार, मिट्टी और साधारण पत्थर से बने शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए। ऐसे शिवलिंगों का प्रसाद भगवान शिव के गणों को समर्पित माना जाता है। जिन स्थानों पर चंड का अधिकार माना गया है, वहां का प्रसाद सामान्य मनुष्यों के लिए वर्जित बताया गया है।

किन शिवलिंगों का प्रसाद ग्रहण करना शुभ है?
ग्रंथों के अनुसार, नर्मदा नदी से प्राप्त पत्थर से बने शिवलिंग, धातु से निर्मित शिवलिंग (चांदी, तांबा, पीतल), सिद्धि या मंत्रों द्वारा स्थापित शिवलिंग, और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण करना शुभ और दोषरहित माना गया है।
प्रसाद से जुड़ा विशेष नियम
शिव पुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति शिवलिंग को विधिपूर्वक स्नान कराकर तीन बार आचमन करता है, उसके शरीर, मन और वाणी तीनों प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही, जो प्रसाद सामान्यतः ग्रहण योग्य न माना जाए, वह भी शालिग्राम के स्पर्श से ग्रहण योग्य हो जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद पूरी तरह निषिद्ध नहीं है, बल्कि शिवलिंग के प्रकार और स्थापना विधि के आधार पर इसके ग्रहण के नियम तय होते हैं। नियमों का पालन कर, श्रद्धा और शुद्ध भाव से शिव प्रसाद ग्रहण करने से पुण्य, शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है।