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पुरुषों को भी है रोने का हक, अपनी फीलिंग्‍स को शेयर करने में कोई हर्ज नहीं

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 15 Jun, 2022 11:32 AM
पुरुषों को भी है रोने का हक, अपनी फीलिंग्‍स को शेयर करने में कोई हर्ज नहीं

महिलाएं इमोशनली कितनी ही स्ट्रांग हो वो अपने आप को रोने से रोक नहीं पाती हैं, लेकिन आदमी बहुत मुश्किल से रोते हुए दिखेंगे। माना जाता है कि रोना यानि कमजोर होने की निशानी होता हैं और आदमी खुद को कमजोर दिखाना नहीं चाहते हैं। इस सब में ये मानना सही नहीं है कि पुरुषों का दिल नहीं दुखी होता या फिर वह मानसिक समस्याओं का सामना नहीं करते। 


अपनी परेशानी शेयर नहीं करते पुरुष

तनाव, चिंता, डिप्रेशन आदि से पुरुष-महिला दोनों ही ग्रस्त होते हैं, लेकिन महिलाओं की तुलना में अधिकतर पुरुष अपनी मेंटल कंडीशन को दूसरों से शेयर करने से कतराते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल महिलाओं की तुलना में पुरुष आत्महत्या करते हैं, जो बेहद चिंता का विषय है। कोरोना के दौर में  मेंटल हेल्थ एक बहुत बड़ा इशू रहा है। 

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स्ट्रेस और डिप्रेशन हो रहा हावी

मेंटल हेल्थ यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें लोग अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। अपनी परेशानियों को दूसरों से शेयर करने से बचते हैं। स्ट्रेस और डिप्रेशन उन पर इतना हावी हो जाता है कि वह खुद की जिंदगी समाप्त कर लेते हैं। एक सर्वे के अनुसार, वर्ष 1999 की आखिरी रिपोर्ट के बाद से पुरुषों में आत्महत्या की दर चार गुना ज्यादा बढ़ गई है। इन मौतों की वजह है उनकी मेंटल हेल्थ कंडीशन। 

 

अपनी फीलिंग्‍स  करनी चाहिए शेयर 

दरअसल बचपन से ही पुरुषों को यह सिखाया गया है कि लड़के नहीं, लड़कियां रोती हैं जबकि सच्‍चाई कुछ अलग है। रोना  एक मानसिक अनुभूति है जो तनाव को कम करने का काम करती है। लेकिन जब इंसान नहीं रोता है और नेचर के विपरीत जाकर तनाव के बावजूद खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करता है तो वह  बेचैन रहता है। ऐसे में जरूरी है कि वो अपनी फीलिंग्‍स को कहीं शेयर करें और मेडिटेशन का सहारा लें। 

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पुरुषों पर भी ध्यान देने की जरूरत

विद्यासागर इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो एंड अलाइड साइंसेज में सलाहकार और न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट पल्लव बोनर्जी का कहना है कि अगर आसपास का माहौल रूढ़िवादी, नकारात्मक, भेदभावपूर्ण है तो वह व्यक्ति लोगों से मदद मांगने और अपनी बातों को साझा करने से हिचकता है। उनका कहना है कि पुरुषों की मेंटल हेल्थ पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है, जितना महिलाओं की। 

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 शराब का सहारा लेते हैं पुरुष

पुरुषों की मेंटल हेल्थ अगर ठीक नहीं भी हो तो वे मदद नहीं मांगते ना ही डिप्रेशन, सब्सटेंस एब्यूज और स्ट्रेसफुल लाइफ इवेंट को लेकर किसी प्रकार के ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं। तलाकशुदा पुरुषों में डिप्रेशन ज्यादा कॉमन और सीवियर है। सिंगल रहने पर पुरुषों में आत्महत्या के मामले ज्यादा दिखाई देते हैं। मेंटल हेल्थ की जब बात आती है, तो पुरुष दूसरों से मदद लेने की बजाय एल्कोहल, स्मोकिंग आदि का सेवन अधिक करने लग जाते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि समाज में एक मिथ फैला हुआ है कि शराब पीने से थकान, स्ट्रेस, मानसिक परेशानियां दूर हो सकती हैं, पर ऐसा नहीं है। स्ट्रेस में आकर अधिक स्मोक करना, एल्कोहल का सेवन ठीक नहीं है

 

ये हैं मेंटल हेल्थ के लक्षण

पुरुषों में मानसिक विकार के संकेतों या लक्षणों में चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, थकान या बेचैनी, सिर-दर्द, शराब या नशीली दवाओं का अधिक मात्रा में सेवन करना शामिल है। लेकिन अकसर इन लक्षणों की अनदेखी कर दी जाती है, जो आगे जाकर काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं। एक शोध में बताया गया था कि हैप्पी लाइफ जीने वाले पुरुषों की संख्या बहुत कम है। बिजी लाइफ जीने वाले पुरुष मानसिक रूप से बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं।

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मेंटल हेल्थ से ऐसे बचाएं खुद को 

मेंटल हेल्थ की समस्या को लेकर शर्मिंदा महसूस ना करें। यदि आपको लगता है कि मानसिक स्वास्थ के कारण आपको नींद नहीं आ रही है, उदासी महसूस कर रहे हैं, मन में अशांति है, किसी भी कार्य में ध्यान लगाने में दिक्कत होती है, तो बिना झिझक के किसी भी ऐसे व्यक्ति से अपनी मन की बातों को शेयर करें, जिस पर आपको पूरी तरह से विश्वास हो। आपको लगता है कि तनाव के कारण आपकी पर्सनल, प्रोफेशनल और सोशल लाइफ डिस्टर्ब हो रही है, तो इस पर ध्यान दें।

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