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Nari

बिंदी सिर्फ फैशन ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी होती है काफी फायदेमंद

  • Edited By palak,
  • Updated: 12 Jul, 2022 05:20 PM
बिंदी सिर्फ फैशन ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी होती है काफी फायदेमंद

महिलाओं के साज श्रृंगार में बिंदी भी बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। अकसर महिलाएं इन्हें भौंहों के बीच के पॉइंट पर ही लगाती हैं। लेकिन बहुत सी महिलाएं यह बात नहीं जानती होंगी की बिंदी इस पॉइंट पर लगाने से न सिर्फ फैशन बल्कि स्वास्थ्य भी बहुत ही अच्छा रहता है। बिंदी के ऊपर कई गानें और शायरियां भी बन चुकी हैं। प्राचीन काल से ही बिंदी लगाने का प्रचलन चलता आ रहा है। इसके बिना नारी का सौंदर्य भी पूरा नहीं होता। दक्षिण भारत में पुरुष और स्त्री दोनों बिंदी लगाते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि इससे आपको क्या स्वास्थ्य लाभ होंगे...

बिंदी लगाने की जगह होती है अहम 

महिलाएं अक्सर फैशन के तौर पर बिंदी का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि बिंदी लगाने के और स्वास्थ्य को भी कई फायदे होते हैं। बिंदी को हमेशा भौहों के बीच ही लगाया जाता है। इस पॉइंट को सेहत के अनुसार भी बहुत ही जरुरी माना जाता है। योग की भाषा में भौहों के बीच की जगह को अजना चक्र या अज्ञ चक्र कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह इंसानी शरीर का छठा और सबसे ज्यादा शक्तिशाली चक्र होता है। इसी जगह से सिर, आंखें, दिमाग, पीनल ग्लैंड, पिट्यूटरी ग्लैंड और पीयूष ग्रन्थि जुड़ी रहती है। योग में ऐसे कई आसन बताए गए हैं, जिनमें माथे को जमीन के साथ छुना पड़ता है। इससे यह चक्र एक्टिव हो जाता है। इस चक्र को ज्ञान का केंद्र भी माना जाता है। इसलिए जब बिंदी को इस जगह पर लगाया जाता है तो महिलाएं इसे दबाती हैं जिससे ये चक्र और भी एक्टिव हो जाता है।

 एक्यूप्रेशर में निभाती है अहम किरदार 

पुरानी चीनी मान्यता भी योग से काफी हद तक जुड़ी हुई हैं। चीनी मान्यता के अनुसार, इस पॉइंट को थर्ड आय कहते हैं। हर दिन इस पॉइंट को दबाने से स्वास्थ्य में अच्छा रहता है। इसलिए बिंदी लगाते समय इस जगह को काफी जोर से दबाया जाता है। इससे एक्यूप्रेशर कम होता है। इसके अलावा सिरदर्द भी कम होता है। यहां पर कई ऐसी नसें और धमनियां होती हैं जिन्हें रेगुलर तरीके के साथ दबाने से शरीर सेहतमंद रहता है।

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चेहरे की झुर्रियां होगी कम 

यह बात जानकर आप काफी हैरान होंगे कि रोज माथे पर बिंदी लगाने से आपकी आंखों की रोशनी तेज होती है। भौहों के बीच की जगह में से सुप्राट्रोक्लियर नाम की नस गुजरती है जो आंखों की सारी नसों से जुड़ी होती है। इस नस पर जैसे ही दबाव पड़ता है यह और भी ज्यादा मजबूत होती है। इसके अलावा माथे पर इसी जगह से ट्रायजेमिनल नस भी गुजरती है। यदि आप इस नस को रोज दबाते हैं तो चेहरे की मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं। इससे इंसान के चेहरे पर भी झुर्रियां नहीं पड़ती और डिप्रेशन से जुझ रहे लोगों के लिए भी इस जगह पर दबाना बहुत ही फायदेमंद होता है।

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एकाग्रता का केंद्र 

बिंदी को दो भौंहों के बीच में थोड़ा सा दाहिने ओर पहनते हैं यहां शरीर की सारी नसे होती हैं। इसी को अग्नि चक्र और तृतीय नेत्र भी कहते हैं। यहां बिंदी लगाने से मन शांत रहता है और तानव भी कम होता है।

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साइनस से मिलता है आराम 

इस प्वाइंट पर मसाज करन से रक्त का संचालन नाक और उसके आस-पास की जगह पर अच्छे से होने लगता है। इससे साइनस के कारण होने वाली सूजन भी कम हो जाती है और बंद नाक भी खुल जाता है। इस जगह को दबाने से काफी आराम मिलता है।

एक तरफ चेहरे का पैरालाइसिस को करती है दूर 

इस प्वाइंट पर मसाज करने से चेहरे की नसे उत्तेजित होती हैं। पैरालाइसिस जैसी खतरनाक बीमारी के लक्षण से भी राहत मिलती है। आयुर्वेद में इस थैरेपी को शिरोधरा कहा जाता है। इस थैरेपरी में 40-60 मिनट के लिए मेडिकेटेड ऑयल के साथ इस बिंदु में मसाज की जाती है। 

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आंखों की मांसपेशियों होती हैं अच्छी 

इस जगह पर मसाज करने से केंद्रबिन्दु की नसे आंखों के मांसपेशियों के साथ संबंधित होती है। यह अगल-बगल और स्पष्ट देखने में सहायता करती हैं।

अनिद्रा से मिलती है राहत 

बिंदी लगाने से चेहरा, गर्दन, पीठ और ऊपरी भागों की मांसपेशियों को शांत करने में सहायता करती है। इससे अनिद्रा की समस्या काफी तक ठीक हो जाती है।

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