नारी डेस्क : भारत में इन दिनों मौसम का मिजाज आम लोगों को परेशान कर रहा है। दोपहर में धूप थोड़ी राहत देती है, लेकिन सुबह और शाम की ठंड कंपकंपाने पर मजबूर कर रही है। इस दोहरे मौसम का सबसे ज्यादा असर त्वचा और सेहत पर देखा जा रहा है। लोगों को मॉइस्चराइजर लगाने के बावजूद हाथ-पैर, एड़ियां और होंठ फटने की समस्या हो रही है। हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे सूखी ठंड (Dry Cold) का असर बता रहे हैं।
ठंड के दो प्रकार
सूखी ठंड (Dry Cold): हवा में नमी बहुत कम (30–40%) होती है। पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाएं और तेज धूप हवा को और अधिक शुष्क बना देती हैं। इससे त्वचा से नमी तेजी से उड़ जाती है (Trans-epidermal Water Loss), और त्वचा रूखी, खुरदरी और फटी हो जाती है।

नम ठंड (Humid Cold): हवा में नमी ज्यादा (70%+) होती है, जैसे बारिश या कोहरे के दौरान। यह ठंड ज्यादा महसूस होती है, लेकिन त्वचा को पर्याप्त नमी मिलती रहती है, इसलिए त्वचा फटती नहीं।
सूखी हवा कैसे नुकसान पहुंचाती है?
त्वचा के प्राकृतिक तेल (Sebum) कम हो जाते हैं, छोटी दरारें पड़ जाती हैं।
नाक और गले की अंदरूनी परतें सूख जाती हैं, जिससे वायरल संक्रमण, खांसी और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

त्वचा को ठंड से बचाने के उपाय
मॉइस्चराइजर या मरहम इस्तेमाल करें: पेट्रोलियम जेली, शिया बटर या सेरामाइड वाले उत्पाद बेहतर।
'3 मिनट का नियम': नहाने या हाथ धोने के 3 मिनट के अंदर मॉइस्चराइजर लगाएं।
हवा और धूप से बचाव: टोपी, दस्ताने, स्कार्फ का इस्तेमाल करें।
ह्यूमिडिफायर (Humidifier): कमरे में रात को हवा में नमी बनाए रखने के लिए उपयोग करें।

स्वास्थ्य के लिए सावधानियां
हाइड्रेशन (Hydration): पर्याप्त पानी पीते रहें।
श्वसन तंत्र की सुरक्षा (Respiratory system): फ्लू, निमोनिया से बचाव के लिए टीकाकरण, अस्थमा और COPD मरीज अपनी दवाइयां नियमित लें।
हीटर का सही इस्तेमाल: कमरे में हवा के आने-जाने की व्यवस्था रखें।
बारिश या नम हवा आने से हवा में नमी बढ़ जाती है। इससे सूखी ठंड का असर कम होता है, त्वचा को नमी मिलती है, और मौसम नम ठंड में बदल जाता है।