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नया खतराः दिमाग में मिले 400 खून के थक्के, ठीक होने के बाद कोमा में गया कोरोना मरीज

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 01 Jan, 2021 09:46 AM
नया खतराः दिमाग में मिले 400 खून के थक्के, ठीक होने के बाद कोमा में गया कोरोना मरीज

जहां एक तरह कोरोना के नए स्ट्रेन ने दहशत में डाल दिया है वहीं वायरस को लेकर आए दिन चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। दरअसल, हाल ही में दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें कोरोना से रिकवरी के बाद भी मरीज के दिमाग में खून के थक्के बन गए थे। इसके कारण उसकी तबीयत इतनी खराब हो गई कि वह शख्स कोमा में चला गया।

एन्सेफलाइटिस का शिकार हुआ मरीज

डॉक्टरों ने बताया कि जम्मू के रहने वाले इस शख्स को कोरोना के लक्षण महसूस हो रहे थे। निमोनिया और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वायरस के कारण फेफड़े खराब होने लगे थे, जिसके बाद उसे दिल्ली रेफर किया गया। मरीज की हालत दिन ब दिन बिगड़ती देख डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा। कुछ समय बाद वह कोरोना से ठीक होने लगा था लेकिन वह अचानक कोमा में चला गया।

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दिमाग में मिले खून के 400 थक्के

दरअसल, मरीज एन्सेफलाइटिस का शिकार हो गया, जिसके कारण वह कोमा की स्थिति में पहुंच गया। मेडिकल भाषा में इसे कोविड एन्सेफलाइटिस या ल्यूकोएन्सेफलाइटिस कहा जाता है। इस बीमारी के कारण बैक्टीरियल संक्रमण द्वारा मरीज के दिमाग और रीढ़ में सूजन पैदा होने लगती है। रिपोर्ट के मुताबिक, व्यक्ति के दिमाग में 400 से ज्यादा खून के थक्के थे। हालांकि इलाज के बाद उनकी स्थिति में 50% तक सुधार देखने को मिला। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज को छुट्टी दे दी।

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कोरोना से रिकवरी के बाद ब्रेन हैमरेज का डर

रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना से रिकवरी के बाद 50% भारतीय मरीजों में ब्रेन हैमरेज-पैरालिसिस और मिर्गी के मामले देखने को मिल रहे हैं। यही नहीं, कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में दिक्कत जैसी कोविड कॉम्प्लिकेशन जैसी दिक्कतें भी आ रही हैं।

ब्रेन को कैसे नुकसान पहुंचा रहा कोरोना

दरअसल, कोरोना के कारण मरीज का खून गाढ़ा हो जाता है और ब्लड क्लाटिंग बनने लगते हैं। इससे ब्रेन में ब्रेन में खून और ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती, जिससे ब्रेन हैमरेज, पैरालिसिस और मिर्गी के दौरे पड़ना जैसी दिक्कतें हो जाती है। इसे ब्रेन इंफार्क्ट भी कहा जाता है। यही नहीं, कोरोना संक्रमण होने के बाद फेफड़ों और गले में सूजन आ जाती है और 3-5 दिन बाद मरीज का खून गाढ़ा हो जाता है।

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