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विवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए जानें क्यों खास है लोहड़ी का पर्व!

  • Edited By Monika,
  • Updated: 10 Jan, 2026 04:09 PM
विवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए जानें क्यों खास है लोहड़ी का पर्व!

नारी डेस्क : लोहड़ी सिख धर्म का एक प्रमुख और पारंपरिक त्योहार है, जिसे इस वर्ष 13 जनवरी 2026 (Lohri Date 2026) को मनाया जाएगा। यह पर्व मुख्य रूप से फसल, प्रकृति और नई शुरुआत से जुड़ा हुआ है। खास बात यह है कि लोहड़ी को नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए बेहद शुभ और खास माना जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

लोहड़ी क्या है और कब मनाई जाती है?

लोहड़ी को लाल लोई के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। पंजाब के साथ-साथ हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में भी लोहड़ी बड़े ही उत्साह और धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन लोग अग्नि जलाकर मूंगफली, रेवड़ी, तिल और गुड़ अर्पित करते हैं और लोकगीत गाते हैं।

नवविवाहित जोड़ों की पहली लोहड़ी क्यों होती है खास?

नवविवाहित जोड़ों के लिए पहली लोहड़ी को नई शुरुआत, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। परिवार और रिश्तेदार नए जोड़े को आशीर्वाद देते हैं। उपहार, कपड़े और मिठाइयां दी जाती हैं। अच्छे वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। पहली लोहड़ी रिश्तों में प्यार, अपनापन और पारिवारिक एकता को मजबूत करती है। यही वजह है कि इसे पूरे उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है।

नवजात शिशुओं के लिए क्यों शुभ मानी जाती है लोहड़ी?

अगर लोहड़ी के आसपास घर में किसी नवजात शिशु का जन्म होता है, तो इसे बेहद शुभ माना जाता है।
बच्चे की पहली लोहड़ी पर विशेष उत्सव होता है
रिश्तेदार नए कपड़े, खिलौने और मिठाइयां देते हैं
बच्चे के स्वस्थ, सुखी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है
यह पर्व परिवार में नए सदस्य के आगमन को खुशी और आशीर्वाद के साथ स्वीकार करने का प्रतीक है।

लोहड़ी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व (Lohri Significance)

लोहड़ी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है।
यह फसल की कटाई और नई बुवाई से जुड़ा है
किसान अच्छी फसल के लिए अग्नि देव और प्रकृति को धन्यवाद देते हैं
आने वाले वर्ष में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं

सर्दियों की विदाई और नई ऊर्जा का प्रतीक

लोहड़ी सर्दियों के अंत और दिनों के लंबे होने की शुरुआत का संकेत देती है। इसे
नई ऊर्जा, नई उम्मीद, और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है।
यही कारण है कि यह त्योहार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

लोहड़ी नवविवाहित जोड़ों के लिए नए जीवन की शुरुआत का उत्सव है, वहीं नवजात शिशुओं के लिए आशीर्वाद और खुशियों का प्रतीक। प्रकृति, परिवार और परंपराओं से जुड़ा यह पर्व हर किसी के जीवन में सकारात्मकता और उमंग भर देता है।

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