28 JANWEDNESDAY2026 6:35:07 PM
Nari

मौत को छूकर निकला शख्स, गर्दन से दिमाग तक आर-पार घुसा सरिया, देख डॉक्टर भी हैरान

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 28 Jan, 2026 04:57 PM
मौत को छूकर निकला शख्स, गर्दन से दिमाग तक आर-पार घुसा सरिया, देख डॉक्टर भी हैरान

नारी डेस्क:  कहते हैं, “जाको राखे साईंया, मार सके न कोई” यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई। एक मजदूर की गर्दन में करीब 5 फुट लंबा स्टील का सरिया आर-पार घुस गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि वह न सिर्फ बच गया, बल्कि अब पूरी तरह स्वस्थ भी है। डॉक्टरों ने ऐसी हैरतअंगेज और बेहद मुश्किल सर्जरी की, जिसे मेडिकल चमत्कार कहा जा रहा है।

कैसे हुआ भयानक हादसा?

यह घटना एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर रहे मजदूर के साथ हुई। काम के दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़ा। गिरते समय वहां मौजूद स्टील का लंबा सरिया तिरछे कोण से उसकी गर्दन में घुस गया और दूसरी तरफ से बाहर निकल गया।

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सरिया की लंबाई: लगभग 5 फुट

घुसने की जगह: गर्दन का बेहद संवेदनशील हिस्सा। दिमाग तक जाने वाली नसें और स्पाइनल कॉर्ड सिर्फ एक मिलीमीटर की दूरी पर जरा सी भी चूक होती तो मजदूर की मौके पर ही मौत हो सकती थी या वह हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो सकता था।

अस्पताल पहुंचाना भी था बड़ी चुनौती

मजदूर की हालत इतनी नाजुक थी कि हिलना-डुलना भी जानलेवा साबित हो सकता था। लोगों ने बिना सरिया निकाले, उसे उसी हालत में गुड़गांव के आर्टेमिस अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में सरिया को आगे-पीछे से काटा गया, लेकिन फिर भी करीब 2.5 फुट का सरिया शरीर के अंदर फंसा हुआ था।

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डॉक्टर भी रह गए हैरान

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर भी यह देखकर हैरान रह गए कि मरीज जिंदा कैसे है। सबसे पहले दर्द से राहत देने के लिए प्रभावित हिस्से को सुन्न (लोकल एनेस्थीसिया) किया गया। इसके बाद शुरू हुई असली चुनौती सीटी स्कैन करना, ताकि पता चल सके कि सरिया किन-किन अंगों के पास से होकर गुजरा है।

सीटी स्कैन भी आसान नहीं था

सरिया इतना लंबा था कि मरीज सीटी स्कैन मशीन में फिट ही नहीं हो पा रहा था। डॉक्टरों और स्टाफ को काफी मशक्कत करनी पड़ी मरीज की पोजिशन बदली गई। शरीर को बेहद सावधानी से घुमाया गया आखिरकार सीटी स्कैन किया गया। सीटी स्कैन से पता चला कि कैरोटिड आर्टरी (दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नस) जुगुलर वेन्स स्पाइनल कॉर्ड सब सरिया से बस बाल भर की दूरी पर थे।

मरीज सीधा लेट नहीं सकता था, इसलिए

ऑपरेशन बेड को रिक्लाइनिंग पोजिशन में सेट किया गया उसी पोजिशन में सर्जरी शुरू की गई

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कैसे निकाला गया सरिया?

डॉक्टरों ने बताया कि यह सर्जरी बेहद जोखिम भरी थी सबसे पहले दिमाग तक जाने वाली नसों और स्पाइनल कॉर्ड को सुरक्षित किया गया। फिर उसी दिशा में सरिया को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया, जिस दिशा से वह घुसा था। सरिया निकालने के बाद, उसके रास्ते में हुए डैमेज टिशू की बारीकी से मरम्मत की गई। पूरी सर्जरी में एक मिलीमीटर की भी गलती जानलेवा हो सकती थी।

अब मरीज की हालत कैसी है?

डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है

न कोई लकवा

न दिमागी नुकसान

न किसी नस को स्थायी क्षति

डॉक्टरों का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। अगर सरिया कैरोटिड आर्टरी को छू लेता। स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचाता। या दिमाग के किसी हिस्से में घुस जाता। तो मरीज की जान बचना नामुमकिन था।

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सबक क्या है?

यह घटना बताती है कि समय पर अस्पताल पहुंचना कितना जरूरी है। डॉक्टरों की कुशलता और टीमवर्क कैसे जान बचा सकता है। और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी खतरनाक हो सकती है गर्दन से दिमाग तक सरिया घुसने के बावजूद एक इंसान का बच जाना, सच में मेडिकल दुनिया का चमत्कार है। यह कहानी न सिर्फ डॉक्टरों की काबिलियत दिखाती है, बल्कि जिंदगी की नाजुक डोर की भी याद दिलाती है। 

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