08 JANTHURSDAY2026 2:30:45 AM
Nari

बाल स्ट्रेट करवाए और Kidney हो गई खराब, डॉक्टर ने दी साफ Warning

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 06 Jan, 2026 08:24 PM
बाल स्ट्रेट करवाए और Kidney हो गई खराब, डॉक्टर ने दी साफ Warning

नारी डेस्कः खूबसूरती बढ़ाने के लिए महंगे ब्यूटी ट्रीटमेंट्स लेने का चलन तेजी से चल रहा है। सिर्फ स्किन ही नहीं बालों के लिए बहुत से ऑप्शन अब महिलाओं के पास है जैसे हेयर एक्सटेंशन, स्ट्रेट बालों के लिए रिबॉन्डिंग, स्मूदनिंग जैसे कई ट्रीटमेंट्स है जो बालों को घंटों दिए जाते है जिसके बाद आपके बाल बिलकुल सीधे और चमकदार हो जाते हैं लेकिन क्या ये ट्रीटमेंट आपकी हैल्थ के लिए सही है। अगर आप नहीं जानते तो अब जान लें कही ये हेयर ट्रीटमेंट आपकी किडनी खराब ना कर दे और नौबत डायलिसिस की ना आ जाए...ये हम नहीं बल्कि डॉक्टर ब्रजपाल त्यागी का कहना है। उनकी एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। 
PunjabKesari

बाल सीधे करने वाले ट्रीटमेंट में ग्लाइऑक्सीलिक एसिड कैमिकल 

इस वीडियो में वह हेयर स्ट्रेटनिंग और हेयर ट्रीटमेंट लेने वाले लोगों को सावधान करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि हेयर स्ट्रेटनिंग के इस प्रोडक्ट में ग्लाइऑक्सीलिक नाम का एसिड पाया जाता है। ये एसिड बालों को बिलकुल सीधा तो कर देता है लेकिन इसके साथ साथ ये किडनी यानि गुर्दों को डेमेज करता है। इससे नेफ्रोपैथी (Nephropathy)  होता है इससे गुर्दे खराब होने शुरू हो जाते हैं। हाल ही में इजरायल में ऐसा मामला सामने आया जहां 15 साल की एक लड़की ने हेयर ट्रीटमेंट लिया जिसके बाद उसके पेट में दर्द हुआ और बाद में किडनी डेमेज की बात सामने आई। बहुत से देशों में इस कैमिकल के इस्तेमाल पर रोक लगी है। 

नेफ्रोपैथी (Nephropathy) क्या होता है?

नेफ्रोपैथी (Nephropathy) एक किडनी (गुर्दे) की बीमारी है, जिसमें किडनी के फिल्टर करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे शरीर से गंदगी और अतिरिक्त पानी ठीक से नहीं निकल पाते और यूरिन के साथ प्रोटीन भी निकलने लगता है। यह मुख्य रूप से मधुमेह (Diabetes) से होती है, जिसे डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहते हैं और यह किडनी फेलियर का एक प्रमुख कारण है, लेकिन इसके अन्य प्रकार भी होते हैं, जैसे IgA नेफ्रोपैथी और रिफ्लक्स नेफ्रोपैथी। शुरुआती लक्षणों में सूजन, ब्लड प्रेशर बढ़ना, और थकान शामिल हैं और शुरुआती पहचान व इलाज से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। नेफ्रोपैथी होती है तो गुर्दे अपना काम नहीं कर पाते और डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। 

ग्लाइऑक्सीलिक एसिड (Glyoxylic acid) से किडनी डेमेज

ये खतरनाक ग्लाइऑक्सीलिक एसिड (Glyoxylic acid) से किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है,  खासकर बाल सीधे करने वाले उत्पादों (hair straightening products) के ज़रिए क्योंकि यह शरीर में जाकर कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल (calcium oxalate crystals) बनाता है, जिससे किडनी में जमावट (deposition) होती है और तीव्र गुर्दे की क्षति (Acute Kidney Injury - AKI) या किडनी फेलियर (kidney failure) हो सकता है। 

ग्लाइऑक्सीलिक एसिड किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

यह केमिकल त्वचा के माध्यम से अवशोषित होकर शरीर में जाता है। लिवर इसे ऑक्सैलिक एसिड (Oxalic acid) में बदल देता है, जो किडनी के लिए हानिकारक है। ये ऑक्सैलिक एसिड, कैल्शियम के साथ मिलकर कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल बनाता है। ये क्रिस्टल किडनी की नलिकाओं (renal tubules) में जमा हो जाते हैं, जिससे किडनी के कार्य करने की क्षमता खत्म हो जाती है और एक्यूट किडनी फेलियर हो सकता है। 

ऐसा होने पर दिखते हैं ये लक्षण (Symptoms)

पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
मतली (Nausea) और/या उल्टी (Vomiting)
खोपड़ी में जलन (Scalp irritation) 

क्या करें?
यदि ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल के बाद ये लक्षण दिखें तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हेयर स्ट्रेटनिंग और हेयर ट्रीटमेंट्स में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स बालों को खूबसूरत बनाते हैं, लेकिन इनका अत्यधिक या गलत इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। 

1. केमिकल्स का असर

हेयर स्ट्रेटनिंग, कलरिंग और ट्रीटमेंट्स में फॉर्मलिन, सल्फेट, पेराबेन और अमोनिया जैसे केमिकल्स होते हैं।
ये बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुँचाते हैं।
बार-बार इस्तेमाल से बाल कमजोर, रूखे और टूटने वाले हो जाते हैं।

2. स्कैल्प और त्वचा पर असर

खुजली, लालिमा और जलन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
संवेदनशील लोगों में एलर्जी या रैशेज़ भी हो सकते हैं।

3. बालों की जड़ों और रोमछिद्र पर असर

केमिकल बालों की जड़ों को कमजोर कर सकते हैं।
लंबे समय में बाल झड़ने, पतले होने और नई ग्रोथ रुकने का खतरा बढ़ जाता है।

 4. सेहत पर दीर्घकालिक असर

फॉर्मलिन जैसे रसायन सांस की नली और फेफड़ों को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं।
बार-बार और लंबे समय तक इनका इस्तेमाल सिरदर्द, चक्कर और एलर्जी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

5. बचाव और सुरक्षित तरीके

स्ट्रेटनिंग और ट्रीटमेंट कम करें, जरूरत होने पर ही करवाएँ।
प्राकृतिक और हल्के प्रोडक्ट्स जैसे हेयर ऑयल, कंडीशनर और हर्बल ट्रीटमेंट चुनें।
बालों को स्ट्रेस और केमिकल से बचाने के लिए नियमित तेल मसाज और पोषण दें।
प्रोफेशनल सैलून में ही ट्रीटमेंट करवाएँ और हमेशा सुरक्षित ब्रांड्स का इस्तेमाल करें।

Related News