नारी डेस्कः आपने बहुत सी महिलाओं के मुंह से सुना होगा कि उन्हें पेट के हिस्से में हैवीपन महसूस होता है लेकिन बावजूद इसके वह इसे अनदेखा कर देती हैं। महिलाओं में पेट के निचले हिस्से (Lower Abdomen) में भारीपन (Heaviness) और दर्द रहना एक आम समस्या है लेकिन इसके पीछे अलग-अलग कई कारण हो सकते हैं।
पेट के निचले हिस्से में भारीपन और दर्द के बड़े कारण
अगर समस्या पीरियड्स से जुड़ी है तो भी ये यह समस्या हो सकती है। ऐसा पीरियड्स से पहले या दौरान हो सकता है। गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन, ज्यादा ब्लीडिंग या क्लॉट्स होने पर भी भारीपन, खिंचाव और दर्द महसूस होता है।
हार्मोनल असंतुलनः एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन में गड़बड़ी, पीसीओएस (PCOS), पेट के निचले हिस्से में सूजन, भारीपन और दर्द बना रह सकता है।
गर्भाशय में फाइब्रॉएड (गांठ): गर्भाशय में मांसल गांठ बन जाना, ज्यादा ब्लीडिंग, बार-बार पेशाब लगना, लगातार भारीपन और दबाव जैसा दर्द
ओवरी में सिस्ट (Ovarian Cyst): एक तरफ ज्यादा दर्द, सूजन या खिंचाव, अचानक तेज दर्द भी हो सकता है।
एंडोमेट्रियोसिस: गर्भाशय की परत का बाहर बढ़ना, पीरियड्स में असहनीय दर्द, सेक्स के दौरान दर्द, लंबे समय तक भारीपन बना रहता है।
पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID)
गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब में इंफेक्शन
बदबूदार डिस्चार्ज
बुखार के साथ दर्द इलाज न हो तो गंभीर हो सकता है।
यूरिन इंफेक्शन (UTI)
पेशाब में जलन
बार-बार पेशाब आना
निचले पेट में दर्द और भारीपन

कब्ज और गैस
पेट साफ न होना
सूजन, भारीपन ज्यादा देर तक बना रहना अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है
गर्भावस्था से जुड़े कारण
शुरुआती प्रेग्नेंसी में, गर्भाशय का फैलना, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (खतरनाक स्थिति) पेल्विक फ्लोर मसल्स की कमजोरी, 3 से ज्यादा बार प्रेग्नेंसी के कारण, डिलीवरी के बाद ज्यादा वजन उठाने के कारण भी ऐसा होने की संभावना रहती है।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
दर्द बहुत तेज हो
ब्लीडिंग असामान्य हो
बुखार या उल्टी
अचानक वजन गिरना
सेक्स के दौरान दर्द
लगातार 2–3 हफ्ते से समस्या
जांच में किस तरह के टेस्ट होंगे?
अल्ट्रासाउंड
ब्लड टेस्ट
यूरिन टेस्ट
पेल्विक एग्जामिनेशन
राहत के लिए कुछ देसी नुस्खे
गुनगुने पानी की सिकाई
हल्का योग और स्ट्रेचिंग
फाइबर युक्त भोजन
पर्याप्त पानी का सेवन
बिना डॉक्टर सलाह दवा न लें
नोटः पेट के निचले हिस्से में भारीपन और दर्द सामान्य भी हो सकता है, लेकिन अगर यह लगातार या बढ़ता हुआ है तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।