नारी डेस्क : त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, सूखापन और पपड़ीदार परतें बनना सोरायसिस के आम लक्षण हैं। शुरुआत में यह समस्या सामान्य ड्राई स्किन जैसी लग सकती है, लेकिन समय के साथ यह ज्यादा तकलीफदेह हो जाती है। कई बार दवाइयों के साथ-साथ गलत खानपान भी इस बीमारी को तेजी से बढ़ा देता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि सोरायसिस में किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए।
सोरायसिस क्या है?
डॉक्टर के अनुसार, सोरायसिस एक पुरानी त्वचा संबंधी समस्या है, जिसमें त्वचा पर लाल चकत्ते, तेज खुजली, सूखापन और सफेद पपड़ीदार परतें बनने लगती हैं। यह रोग पूरी तरह ठीक तो नहीं होता, लेकिन सही इलाज, आहार और दिनचर्या से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

सोरायसिस में इन चीजों से करें परहेज
तली-भुनी और फास्ट फूड
समोसा, कचौड़ी, पकौड़ी, चिप्स, बर्गर, पिज्जा और बेकरी आइटम शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाते हैं, जिससे त्वचा की सूजन और खुजली और ज्यादा बढ़ सकती है।
ज्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना
लाल मिर्च, गरम मसाला और अत्यधिक नमक सोरायसिस के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। इससे त्वचा में जलन और खुजली बढ़ने लगती है।
मैदा से बनी चीजें
नूडल्स, सफेद ब्रेड, पिज्जा और मैदे से बने अन्य खाद्य पदार्थ पाचन को बिगाड़ते हैं, जिसका सीधा असर त्वचा पर पड़ता है।

रेड मीट और ज्यादा डेयरी प्रोडक्ट
लाल मांस, ज्यादा अंडा, फुल क्रीम दूध, चीज और बटर का अधिक सेवन सोरायसिस के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
शराब और धूम्रपान
डॉक्टर के अनुसार शराब और सिगरेट सोरायसिस में सबसे ज्यादा हानिकारक माने जाते हैं। ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं और दवाओं के असर को भी कम कर देते हैं।
फलों से भी बढ़ सकती है परेशानी
कुछ मरीजों में खट्टे फल और अत्यधिक मीठी चीजें भी सोरायसिस को बढ़ा सकती हैं। ज्यादा चीनी, मिठाइयां और कोल्ड ड्रिंक्स लेने से शरीर में सूजन बढ़ती है, जिससे त्वचा की समस्या और गंभीर हो सकती है।

क्या खाना है फायदेमंद?
सोरायसिस में केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि सही आहार और दिनचर्या भी उतनी ही जरूरी है।
मरीजों को चाहिए कि वे हल्का, सुपाच्य और सात्विक भोजन करें।
हरी सब्जियां और मौसमी फल खाएं
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
नियमित दिनचर्या अपनाएं और तनाव से बचें।
सोरायसिस को कंट्रोल में रखने के लिए गलत भोजन से परहेज करना सबसे पहली और जरूरी शर्त है। अगर मरीज खानपान में संयम रखें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार जीवनशैली अपनाएं, तो इस बीमारी के लक्षण काफी हद तक नियंत्रित किए जा सकते हैं।