नारी डेस्कः बॉलीवुड नगरी सिर्फ गाने-डांस और सितारों की चमक नहीं है बल्कि यह भारत की सोच, समाज और समय का आईना भी रहा है लेकिन इस मायानगरी की शुरुआत कैसे हुई, पहले दौर में फिल्में कैसे, किन हालातों में बनाई जाती थीं और आज का ग्लैमरस सिनेमा किन पड़ावों से होकर गुज़रा है, यह सब जानने की उत्सुकता आप भी रखते हैं तो मुंबई का NMIC (नेशनल म्यूज़ियम ऑफ इंडियन सिनेमा) की सैर जरूर करें क्योंकि नेशनल म्यूज़ियम ऑफ इंडियन सिनेमा भारत का पहला ऐसा म्यूजिम है जो सिनेमा की कहानी को सबसे करीब से दिखाता है। यहां बॉलीवुड और भारतीय सिनेमा की पूरी यात्रा इतिहास के रूप में संजोकर रखी गई है। पीआईबी चंडीगढ़ व मुंबई टीम द्वारा विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़ी महिला पत्रकारों को नेशनल म्यूजियम की प्रेस यात्रा करवाई गई। पंजाब केसरी ग्रुप की ओर से शामिल महिला पत्रकार ने भी इस शानदार म्यूजिम की यात्रा की और इस रोचक अनुभव को आर्टिकल के रुप में साझा किया।

मुंबई का NMIC (नेशनल म्यूज़ियम ऑफ इंडियन सिनेमा) में आपको फिल्मी जगत व फिल्मी सितारों की शुरुआती दौर से जानकारी मिलेगी। पहले के दौर में फिल्में कैसे बनाई जाती थीं और सिनेमा ने समय के साथ कैसे रूप बदला, तो मुंबई का NMIC (नेशनल म्यूज़ियम ऑफ इंडियन सिनेमा) आपके लिए एक खास जगह है। यहां भारतीय सिनेमा के जन्म से लेकर आधुनिक फिल्मों तक की पूरी यात्रा को बेहद आसान और रोचक तरीके से दिखाया गया है। फिल्म प्रेमियों, छात्रों और सिनेमा को समझने की चाह रखने वालों के लिए NMIC एक ऐसा अनुभव है, जिसे एक बार जरूर देखना चाहिए।

सिनेमा इतिहास, कला और विकास को समर्पित पहला नेशनल म्यूजिम
NMIC (नेशनल म्यूज़ियम ऑफ इंडियन सिनेमा), मुंबई भारत का पहला और एकमात्र ऐसा नेशनल म्यूजिम है, जो पूरी तरह भारतीय सिनेमा के इतिहास, कला और विकास को समर्पित है। यह म्यूज़ियम NFDC (नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के अंतर्गत आता है और मुंबई के पेडर रोड स्थित गुलशन महल और न्यू म्यूज़ियम बिल्डिंग में स्थित है। यह जगह खास तौर पर इसलिए चुनी गई क्योंकि मुंबई को भारतीय सिनेमा की जन्मस्थली माना जाता है।

भारतीय सिनेमा की विरासत को संभालना NMIC म्यूज़ियम का मकसद
NMIC को खोलने का मुख्य मकसद भारतीय सिनेमा की 100 से ज्यादा साल पुरानी विरासत को संरक्षित करना और उसे आम लोगों, छात्रों और फिल्म प्रेमियों तक पहुंचाना है। यह म्यूज़ियम यह दिखाता है कि कैसे सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, सामाजिक बदलाव, राजनीति और तकनीक का भी अहम हिस्सा रहा है। साथ ही, यह आने वाली पीढ़ियों को सिनेमा के इतिहास से जोड़ने का एक प्रयास है।

मूक फिल्मों से लेकर कॉस्ट्यूम तक, यहां मिलेगा दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह
1. NMIC (नेशनल म्यूज़ियम ऑफ इंडियन सिनेमा), भारतीय सिनेमा से जुड़ी कई दुर्लभ और ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह है। यहां भारतीय सिनेमा की पूरी विरासत को बहुत ही व्यवस्थित और रोचक तरीके से संग्रहित किया गया है। यहां आने वाला हर दर्शक यह समझ पाता है कि भारतीय सिनेमा ने समय के साथ कैसे आकार लिया और समाज पर उसका क्या असर पड़ा।
2. दादा साहब फाल्के और मूक फिल्मों के दौर से लेकर आज के डिजिटल सिनेमा तक की पूरी यात्रा दिखाई गई है। आज के डिजिटल और VFX आधारित सिनेमा तक की पूरी यात्रा को दर्शाया गया है। शुरुआती दौर में बिना आवाज़ बनने वाली फिल्मों से लेकर साउंड, रंगीन और आधुनिक तकनीक तक के बदलाव को क्रमबद्ध रूप से दिखाया गया है, जिससे सिनेमा के विकास को आसानी से समझा जा सके।

3. यहां आपको पुरानी और मशहूर फिल्मों के पोस्टर, स्क्रिप्ट, स्टिल फोटोग्राफ्स और रिकॉर्ड्स मिलेंगे। NMIC में पुरानी और ऐतिहासिक फिल्मों के पोस्टर, ओरिजिनल स्क्रिप्ट, स्टिल फोटोग्राफ्स, गाने और रिकॉर्ड्स सुरक्षित रखे गए हैं। ये संग्रह दर्शकों को उस दौर की फिल्म निर्माण प्रक्रिया, कहानी कहने की शैली और दर्शकों की पसंद से परिचित कराते हैं।

4. संग्रहालय में सिनेमा में इस्तेमाल होने वाले पुराने कैमरे, प्रोजेक्टर, एडिटिंग मशीनें और साउंड रिकॉर्डिंग उपकरण भी देखने को मिलते हैं। इन उपकरणों के माध्यम से यह समझाया जाता है कि पहले फिल्में कैसे शूट और एडिट की जाती थीं और तकनीक के विकास ने सिनेमा को कैसे बदला।

5. प्रसिद्ध फिल्मों के कॉस्ट्यूम, अवॉर्ड्स और यादगार सीन यहां सरंक्षित किए गए हैं। इसके अलावा, यहां कई प्रसिद्ध फिल्मों के कॉस्ट्यूम, अवॉर्ड्स और यादगार सीन भी प्रदर्शित हैं, जो दर्शकों को सिनेमा से भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं। ये चीज़ें फिल्मों के पीछे की मेहनत, रचनात्मकता और कला को करीब से महसूस कराने का काम करती हैं।

6. NMIC की एक खास गैलरी भारतीय सिनेमा और समाज के रिश्ते पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे फिल्मों ने सामाजिक बदलाव, राजनीतिक विचारधाराओं और तकनीकी प्रगति को प्रभावित किया, और कैसे समाज की सोच फिल्मों में झलकती रही।
आसान से शब्दों में कहे तो यह सिर्फ म्यूजिम ही नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा को समझने, महसूस करने और उसकी यात्रा को करीब से जानने का एक अनोखा अनुभव है जहां सिनेमा प्रेमियों को इतिहास, कला और तकनीक तीनों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां पहुंच कर इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले, ऑडियो-विज़ुअल प्रेज़ेंटेशन और फिल्म क्लिप्स के ज़रिए दर्शकों को सिनेमा का जीवंत अनुभव मिलता है।