
नारी डेस्कः आज सैफ सोहा के पिता मंसूर अली खान पटौदी की बर्थ एनिवर्सरी है इस मौके पर सोहा ने अपने पिता की पुरानी यादें शेयर की है। मंसूर अली खान जो पटौदी नवाब थे लेकिन बावजूद इसके उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत स्ट्रगल किया। 5 जनवरी 1941 में भोपाल के पटौदी खानदान में पैदा हुए मंसूर अली खान सिर्फ 11 साल के थे जब पिता का साया उनके सिर से उठ गया। उनके पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी भारत के साथ ही इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं लेकिन अचानक दिल का दौरा पड़ने से वह चल बसे।
उसके बाद मंसूर अली पर सारी जिम्मेदारी आई। वह भी पिता की तरह क्रिकेट का शौक रखते थे और क्रिकेट को ही करियर बनाने का सपना देखते थे। इसके बाद वह इग्लैंड चले गए और वह 20 साल के थे जब इंग्लैंड में वह कार हादसे का शिकार हो गए। कार के शीशे का एक टुकड़ा उनके दाहिनी आंख में घूस गया था। उनका आंख का ऑपरेशन करना पड़ा लेकिन एक आंख की रोशनी चली गई। उसके बाद यह समझा गया कि अब उनका करियर क्रिकेट में खत्म ही है लेकिन मंसूर अली नेट पर उतरे और एक आंख से ही खेलने की प्रेक्टिस करने लगे। एक्सीडेंट के 6 महीने के अंदर ही उन्होंने भारत के लिए टेस्ट डेब्यू कर लिया।

मंसूर अली खान पटौदी सिर्फ 21 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम को कप्तान बन गए थे। वह आज भी टेस्ट में कप्तानी करने वाले सबसे युवा भारतीय हैं। उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे महान कप्तानों में एक माना जाता है। पटौदी ने भारत के लिए 46 टेस्ट मैच खेले। नवाब पटौदी के छक्के काफी मशहूर थे। इसके साथ ही उन्हें अपने समय का दुनिया का सबसे बेहतरीन फील्डर भी माना जाता था।
पर्सनल लाइफ में भी पटौदी नवाब परफेक्ट मेन थे। मंसूर अली खान ने दुनिया की परवाह ना कर बॉलीवुड की एक्ट्रेस शर्मिला टेगौर से इंटरकास्ट मैरिज की थी हालांकि पहले दोनों के परिवार भी इस शादी से राजी नहीं थे और जब शादी हुई तो लोगों को भी लगता था ये शादी लंबा नहीं चलेगी लेकिन शर्तों पर हुई इस शादी ने सबको झूठा साबित कर दिया। शर्मिला टैगोर ने भी प्यार में सारी हदें पार की थी और हिंदू से मुस्लिम बन गई थी क्योंकि शर्मिला की सासू मां यानि मंसूर अली खान की अम्मी ने एक शर्त रखी थी कि इसे मानोगी तो कभी शादी होगी।

शर्मिला की सासू मां साजिदा सुल्तान ने एक शर्त रखी थी कि अगर शर्मिला अपना धर्म बदलकर इस्लाम धर्म कबूल कर लें, तभी दोनों की शादी हो सकती है। ऐसे में शर्मिला ने मंसूर अली खान के प्यार के लिए ये शर्त मान ली और इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया और शर्मिला बेगम आयशा सुल्ताना बन गईं हालांकि पहले शर्मिला को मनाने के लिए पटौदी नवाब ने खूब पापड़ बेले थे। शर्मिला को मनाने के लिए मंसूर अली ने कभी गुलाब तो कभी खानदानी फ्रिज भेजे थे। शर्मिला के लिए मंसूर ने एक-एक कर 7 फ्रिज भी भेजे थे तब जाकर शर्मिला ने हां की थी। उस समय ये फ्रिज बड़े खानदानों की निशानी माने जाते थे। बस उनके भेजे फ्रिजों का आगे शर्मिला अपना दिल हार गई हालांकि लोग शर्ते लगाते थे कि ये शादी कुछ ही सालों में टूट जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। तह दिल से प्यार निभाने वाली ये जोड़ी आपको कैसी लगी हमें बताना ना भूलें।