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Research का दावा: रात में ट्रैफिक का शोर बढ़ा सकता है कोलेस्ट्रॉल

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 25 Feb, 2026 10:35 AM
Research का दावा: रात में ट्रैफिक का शोर बढ़ा सकता है कोलेस्ट्रॉल

नारी डेस्क: आमतौर पर दिल की बीमारी और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लिए खराब खानपान, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी को जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आया है कि आपके घर के बाहर रातभर होने वाला ट्रैफिक शोर भी दिल की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार रात में सड़क का शोर शरीर के हार्मोन और खून की रासायनिक संरचना पर असर डालता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है।

नींद में खलल है सबसे बड़ी वजह

अध्ययन के मुताबिक, रात में होने वाला ट्रैफिक शोर भले ही व्यक्ति को पूरी तरह से न जगाए, लेकिन यह उसकी नींद की गुणवत्ता को खराब कर देता है। नींद का बार-बार टूटना या गहरी नींद न आना शरीर में तनाव प्रतिक्रिया (Stress Response) को सक्रिय कर देता है। इससे शरीर में कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो शरीर वसा (फैट) को सही तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाता। इसका सीधा असर खून में मौजूद कोलेस्ट्रॉल पर पड़ता है और बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (LDL) बढ़ने लगता है।

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तीन देशों में 2.7 लाख से ज्यादा लोगों पर अध्ययन

यह बड़ा अध्ययन ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड के कुल 2,72,229 वयस्कों पर किया गया। वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों के ब्लड सैंपल लिए और यह अनुमान लगाया कि वे सोते समय कितने डेसिबल (dB) शोर के संपर्क में रहते हैं। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन लोगों के घर ज्यादा ट्रैफिक वाली सड़कों के पास थे और जो रात में अधिक शोर झेलते थे, उनके खून में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल और अन्य हानिकारक रक्त वसा का स्तर ज्यादा था।

50 डेसिबल के बाद बढ़ने लगता है खतरा

अध्ययन के नतीजों में एक साफ पैटर्न सामने आया। जिन लोगों को रात में करीब 50 डेसिबल या उससे अधिक शोर का सामना करना पड़ता था, उनमें कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ने लगा। 55 डेसिबल या उससे अधिक शोर में यह संबंध और ज्यादा मजबूत दिखाई दिया। जानकारी के लिए बता दें कि 50–55 डेसिबल का शोर सामान्य बातचीत या हल्के ट्रैफिक के बराबर होता है। यानी कई शहरी इलाकों में रहने वाले लोग रोजाना इस स्तर का शोर झेलते हैं।

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प्रदूषण से अलग है शोर का असर

वैज्ञानिकों ने यह भी जांचा कि कहीं यह असर सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से तो नहीं है। इसके लिए उन्होंने धूम्रपान, मोटापा, शिक्षा स्तर, लिंग और वायु प्रदूषण जैसे अन्य कारकों को अलग करके विश्लेषण किया। इसके बाद भी रात के शोर और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के बीच स्पष्ट संबंध बना रहा। इससे संकेत मिलता है कि समस्या सिर्फ प्रदूषण नहीं, बल्कि शोर भी अपने आप में एक बड़ा जोखिम कारक है।

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क्यों खतरनाक है एलडीएल कोलेस्ट्रॉल?

एलडीएल (Low-Density Lipoprotein) को ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ कहा जाता है क्योंकि यह धमनियों में जमा होकर उन्हें संकरा कर देता है। इससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक व अन्य हृदय रोगों की संभावना बढ़ जाती है।

क्या है इसका मतलब?

इस अध्ययन से यह साफ संकेत मिलता है कि दिल की सेहत सिर्फ खानपान और एक्सरसाइज पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि हमारे आसपास का वातावरण भी अहम भूमिका निभाता है। खासकर शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए रात का लगातार ट्रैफिक शोर एक छिपा हुआ खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर साउंडप्रूफिंग, खिड़कियों को बंद रखना, व्हाइट नॉइज़ मशीन का उपयोग या शांत इलाकों में रहने जैसे उपाय नींद की गुणवत्ता सुधारने और संभावित जोखिम कम करने में मददगार हो सकते हैं।  

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