नारी डेस्क: हमारा शरीर जब भी किसी परेशानी से गुजरता है तो वह छोटे-छोटे संकेत देने लगता है। इन्हीं संकेतों में से एक है थायरॉयड की गड़बड़ी। थायरॉयड गले के सामने स्थित तितली के आकार की एक छोटी सी ग्रंथि (ग्लैंड) होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी ऊर्जा बनने की प्रक्रिया को कंट्रोल करती है। जब यह सही से काम नहीं करती, तो पूरे शरीर पर असर पड़ता है। थायरॉयड की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर समय रहते पहचान हो जाए, तो इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
थायरॉयड क्या करता है?
थायरॉयड हार्मोन बनाता है, जो शरीर में ऊर्जा की खपत, दिल की धड़कन, शरीर का तापमान, वजन और यहां तक कि मूड को भी प्रभावित करता है। जब यह हार्मोन कम बनने लगते हैं (हाइपोथायरॉयडिज्म), तो शरीर की कार्यप्रणाली धीमी पड़ जाती है।

ये 5 लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
जरूरत से ज्यादा ठंड लगना
अगर मौसम सामान्य है, लेकिन आपको बार-बार ठंड लग रही है और आसपास के लोगों की तुलना में आप ज्यादा सर्दी महसूस कर रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपका मेटाबॉलिज्म धीमा हो रहा है। थायरॉयड हार्मोन कम होने पर शरीर कम ऊर्जा बनाता है, जिससे शरीर का तापमान गिरने लगता है।
ध्यान लगाने में परेशानी
अगर आपको बार-बार चीजें भूलने लगें, फोकस करने में दिक्कत हो या दिमाग सुस्त महसूस हो, तो इसे सिर्फ तनाव समझकर नजरअंदाज न करें। थायरॉयड हार्मोन का असंतुलन दिमागी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। कई लोग इसे “ब्रेन फॉग” भी कहते हैं।
पीरियड्स में बदलाव
महिलाओं में थायरॉयड की गड़बड़ी का असर मासिक धर्म पर भी पड़ता है। पीरियड्स का अनियमित होना, ज्यादा ब्लीडिंग होना या सामान्य से ज्यादा दिनों तक चलना, ये सभी संकेत हो सकते हैं कि हार्मोनल संतुलन बिगड़ रहा है।

बिना वजह वजन बढ़ना
अगर आपका खान-पान पहले जैसा ही है, फिर भी वजन लगातार बढ़ रहा है, तो यह थायरॉयड की वजह से हो सकता है। जब थायरॉयड हार्मोन कम बनते हैं, तो शरीर कैलोरी धीरे-धीरे जलाता है। इससे वजन बढ़ने लगता है, खासकर चेहरे और पेट के आसपास।
त्वचा और बालों में बदलाव
त्वचा का ज्यादा रूखा और बेजान हो जाना, बालों का झड़ना या खुरदुरा होना भी थायरॉयड की समस्या का संकेत हो सकता है। कई बार नाखून भी कमजोर और टूटने लगते हैं।
किन लोगों में खतरा ज्यादा होता है?
थायरॉयड की समस्या महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा पाई जाती है। खासकर 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है। अगर परिवार में किसी को पहले से थायरॉयड की बीमारी रही हो, तो जोखिम और बढ़ जाता है। जिन लोगों ने सिर या गर्दन पर रेडिएशन थेरेपी ली है, या जो ऐसी दवाएं लेते हैं जिनमें आयोडीन ज्यादा मात्रा में होता है, उन्हें भी सावधान रहने की जरूरत है। कुछ आनुवंशिक स्थितियां भी थायरॉयड की समस्या का कारण बन सकती हैं।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
अगर ऊपर बताए गए लक्षण कई हफ्तों से बने हुए हैं या धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं, तो देर न करें। खून की जांच जैसे TSH, T3 और T4 टेस्ट करवाना जरूरी है। इन जांचों से पता चल जाता है कि थायरॉयड सही से काम कर रहा है या नहीं। अच्छी बात यह है कि थायरॉयड की बीमारी आम है और दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन अगर इलाज में देरी हो जाए, तो यह दिल की बीमारी, मोटापा, मानसिक तनाव और महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याओं तक का कारण बन सकती है। थायरॉयड की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके लक्षण मामूली लग सकते हैं। लेकिन शरीर बार-बार संकेत दे रहा हो, तो उसे अनदेखा न करें। समय पर जांच और सही इलाज से थायरॉयड को पूरी तरह नियंत्रण में रखा जा सकता है।
अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहें, क्योंकि छोटी सी लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है।