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Padma Awards 2021: कहानी एथलीट सुधा सिंह की, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया देश का नाम रोशन

  • Edited By Janvi Bithal,
  • Updated: 27 Jan, 2021 01:39 PM
Padma Awards 2021: कहानी एथलीट सुधा सिंह की, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया देश का नाम रोशन

पुरूषों को हर काम में पीछे छोड़ आगे आने वाली महिलाएं आज हर एक क्षेत्र में अपना नाम कमा रही हैं। दिन रात लग्न और मेहनत से महिलाओं ने समाज में और लोगों की सोच में बदलाव ला दिया है। हाल ही में भारतीयों का सीना तो तब चौड़ा हो गया जब पद्म पुरस्कार 2021 लिस्ट का ऐलान किया गया। इसमें हमारे देश की बहुत सी महिलाएं और बेटियों के नाम शामिल हैं। इसमें एथलीट सुधा सिंह का नाम भी शामिल है। देश की वो बेटी जो एक साधारण परिवार से है लेकिन अपनी लग्न और मेहनत से सुधा ने ये मुक्काम पाया। 

आपको बता दें कि इंटरनेशनल लेवल की एथलीट सुधा सिंह को देश का सर्वोच्च अवार्ड पद्मश्री के लिए चुना गया है। पद्मश्री के अलावा उन्हें रानी लक्ष्मीबाई और यश भारती अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। तो चलिए आज हम आपको सुधा सिंह की कहानी बताते हैं कि आखिर वह इस मुक्काम तक कैसे पहुंची। 

रायबरेली की है सुधा सिंह 

सुधा सिंह खेल जगत का एक जाना माना नाम है। उन्होंने अपने काम और अपनी मेहनत से कईं अवॉर्ड्स अपने नाम किए हैं। सुधा उत्‍तर प्रदेश की रहने वाली हैं और उनका जन्म रायबरेली में हुआ है। मान की बात इसलिए ज्यादा है क्योंकि सुधा प्रदेश की दूसरी महिला हैं जिन्हें ये अवार्ड देने के लिए चुना गया है। 

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2003 में रखा खेल जगत में कदम 

अकसर ऐसा कहा जाता है कि किसी मुक्काम तक पहुंचना और सफलता अपने नाम करना इतना आसान नहीं होता है। आपको इसके लिए तमाम मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है और कुछ ऐसा ही हुआ था सुधा सिंह के साथ। इस सफर में काफी उतार चढ़ाव भी आए लेकिन वह रूकी नहीं और आगे बढ़ती गई। सुधा ने साल 2003 में खेल जगत में कदम रखा था। सुधा सिंह भी बाकी लड़कियों की तरह आम परिवार से ही थी। उनके पिता सेवानिवृत्त आइटीआइ कर्मी हैं और उनकी माता जी गृहणी हैं। 

आर्थिक संकट था लेकिन परिवार ने दिया पूरा साथ 

आम परिवार की तरह सुधा के घर भी आर्थिक तंगी थी लेकिन इसके बावजूद भी उनके परिवार वालों ने मदद के लिए हाथ पीछे नहीं किए और हमेशा उनकी सपोर्ट बन कर खड़े रहे। आपको बता दें कि सुधा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम ऊंचा कर चुकी हैं। एथलीट एक ऐसा खेल जहां आपको जीत के लिए पूरा जोर लगाना पड़ता है। इसके लिए आपको अपने कदमों को यूं बढ़ाना होता है जैसे कोई ट्रेन भागती हो। सुधा सिंह ने आज अंतरराष्ट्रीय एथलीट है लेकिन उनका मानें तो इसके लिए उनके परिवार वालों ने उनका पूरा साथ दिया। मीडिया से बातचीत में सुधा ने बताया कि उनके घर में आर्थिक तंगी थी लेकिन बावजूद इसके उनके परिवार वालों ने कभी उन्हें पैसे की कमी महसूस नहीं होने दी और इसी कारण से आज सफलता उनके कदमों में हैं। 

पिता को समर्पित करेंगी अपना अवार्ड 

हर एक बेटी का सपना होता है कि वह अपनी सफलता से अपने परिवार वालों का मान बढ़ाए खासकर अपने पिता का। और सुधा का भी यही सपना है। वह अपनी इस सफलता के लिए जहां परिवार वालों को जिम्मेदार मानती हैं वहीं वह अपना अवार्ड पिता को समर्पित करना चाहती हैं। सुधा की मानें तो आज वह जो कुछ भी है अपने पिता के कारण हैं। 

स्टीपलचेज में छोड़ देती हैं सबको पीछे 

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स्टीपलचेज एथलीट में काफी मुश्किल होता है। लेकिन इसमें भी सुधा सिंह आगे हैं। वह तीन हजार मीटर में लगातार सफलता प्राप्त कर चुकी है। 

पढ़ाई से बचने के लिए दौड़ने निकल जाती थी सुधा 

सुधा को बचपन में ही पढ़ाई में नहीं बल्कि खेल कूद में ही उनका मन लगता था। उन्हें पढ़ाई से ज्यादा खेलना पसंद हुआ करता था। कईं बार तो उनके परिवार वाले भी परेशान हो जाते थे। सुधा को जब भी पता लगता है कि घरवाले उन्हें ट्यूशन भेजने लगे हैं तो वह 10 मिनट पहले ही भाग जाया करती थी और इसी एक आदत ने उन्हें एथलीट बना दिया। 

हासिल किया यह सम्मान 

आपको बता दें कि रायबरेली की रहने वाली सुधा सिंह ने महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में 40.03 सेकंड का समय लेकर रजत पदक हासिल किया है। यह उनका एशियाई गेम्स में दूसरा पदक है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया भारत का नाम 

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सुधा सिंह ने विदेशों में जाकर भी सफलता हासिल की और कईं अवार्ड्स अपने नाम किए। सुधा सिंह को वर्ष 2010 में हुए एशियन गेम्स रहा। यहां यूपी की एथलीट ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इतना ही नहीं वर्ष 2009 में सुधा ने एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। फिर इसके बाद साल 2013 में एशियन चैंपियनशिप में भी सुधा को स्वर्ण पदक मिल चुका है। इतना ही नहीं पद्मश्री के अलावा उन्हें रानी लक्ष्मीबाई और यश भारती अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। वहीं 2012 में सुधा को अर्जुन पुरस्कार भी मिल चुका है। 

वाकई आज सुधा सिंह युवाओं के लिए और लड़कियों के लिए एक मिसाल है। 

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