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दिल्ली में PM 2.5  है असली जहर, इसका स्तर बढ़ते ही अस्पतालों में बढ़ जाते हैं मरीज !

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 09 Jan, 2026 01:07 PM
दिल्ली में PM 2.5  है असली जहर, इसका स्तर बढ़ते ही अस्पतालों में बढ़ जाते हैं मरीज !

नारी डेस्क: दिल्ली का प्रदूषण जितना आप सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा जानलेवा है  इसका असर सीधे दिल पर पड़ता है। एक हालिया स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि PM 2.5 में हर 10 पॉइंट की बढ़ोतरी पर हृदय रोग (CVD) के मामलों में करीब 2% का इजाफा हो जाता है। इसमें दिखाया गया है कि जब भी दिल्ली में AQI, PM10 और PM2.5 10 यूनिट बढ़ते हैं, तो मरीज़ों के एडमिशन में 1.8%, 1.2% और 2% की बढ़ोतरी होती है। इस स्टडी में हिल स्टेशन शिमला में भी ट्रेंड्स का एनालिसिस किया गया, लेकिन वहां ऐसे कोई पैटर्न नहीं मिले।

 

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 प्रदूषण और दिल का कनेक्शन क्या है?

PM 2.5 हवा में मौजूद बेहद महीन कण होते हैं, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में जाते हैं वहां से खून में मिलकर दिल और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। स्टडी में पाया गया कि जैसे-जैसे PM 2.5 का स्तर बढ़ता है, वैसे-वैसे हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, दिल की धमनियों में सूजन के मामले बढ़ते हैं।  सिर्फ 10 पॉइंट की बढ़ोतरी पर ही CVD का खतरा 2% तक बढ़ जाता है, जो लंबे समय में बेहद गंभीर साबित हो सकता है।


 प्रदूषण के साथ ही बढ़ने लगते हैं मरीज

निष्कर्षों के अनुसार दिल्ली में AQI में हर 10-पॉइंट की बढ़ोतरी पर एक दिन के अंतराल के साथ कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं में 1.8% की वृद्धि हुई। पार्टिकुलेट मैटर प्रदूषकों के साथ भी इसी तरह की वृद्धि देखी गई: PM10 के साथ एडमिशन में 1.2% और PM2.5 के साथ 2.0% की वृद्धि हुई। तापमान, आर्द्रता और मौसमी रुझानों को एडजस्ट करने के बाद भी ये संबंध महत्वपूर्ण बने रहे। इसके विपरीत, शिमला में अध्ययन की अवधि के दौरान वायु प्रदूषण के स्तर और कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के बीच असंगत और सांख्यिकीय रूप से गैर-महत्वपूर्ण संबंध दिखे, इसके बावजूद कि कुछ महीनों में पार्टिकुलेट मैटर का स्तर अनुशंसित स्तर से अधिक था।
 

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दिल्ली के लोगों के लिए खतरा क्यों ज्यादा?


दिल्ली में भर्ती होने वाले मरीज औसतन कम उम्र के थे और उनमें शारीरिक निष्क्रियता, अधिक नमक और अधिक वसा वाला आहार, उच्च रक्तचाप और मनोवैज्ञानिक तनाव की रिपोर्ट करने की अधिक संभावना थी। शिमला में, मरीजों में तंबाकू धूम्रपान और खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन का उपयोग अधिक आम था। दिल्ली में  लंबे समय तक खराब हवा के संपर्क में रहना, ट्रैफिक और इंडस्ट्रियल प्रदूषण, सर्दियों में स्मॉग की मोटी परत ये सभी मिलकर दिल पर लगातार दबाव डालते हैं। इसका सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्ग, हाई BP या डायबिटीज के मरीज, पहले से दिल की बीमारी वाले लोग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं को होता है 


दिल को प्रदूषण से बचाने के तरीके

AQI ज्यादा हो तो घर से बाहर निकलने से बचें, बाहर जाएं तो N95 मास्क पहनें। घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। हार्ट-फ्रेंडली डाइट (फल, सब्जियां, ओमेगा-3) को अपनी डाइट में शामिल करें। नियमित चेकअप और हल्की एक्सरसाइज करें।  एक्सपर्ट्स की चेतावनी प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों की नहीं, दिल की भी गंभीर बीमारी है। दिल्ली का प्रदूषण खामोशी से दिल को नुकसान पहुंचा रहा है।
PM 2.5 में हर बढ़ोतरी के साथ हृदय रोग का खतरा भी बढ़ता है, इसलिए इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। साफ हवा सिर्फ सांस के लिए नहीं, दिल की सेहत के लिए भी जरूरी है।

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